छत्रपति संभाजीनगर मनपा (सोर्सः सोशल मीडिया)
छत्रपति संभाजीनगर

संभाजीनगर मनपा पर अनुदान का संकट, संपत्ति कर में 9.44% वृद्धि जरूरी, अन्यथा वित्त आयोग के अनुदान पर संकट

Property Tax Hike: छत्रपति संभाजीनगर मनपा के सामने 15वें वित्त आयोग का अनुदान बचाने की चुनौती है। संपत्ति कर आय में 9.44% वृद्धि जरूरी है, जबकि 5 लाख से अधिक संपत्तियों से आय करीब 162 करोड़ रुपए है।

शफीउल्ला हुसैनी, आंचल लोखंडे

Chhatrapati Sambhajinagar Municipal Corporation: छत्रपति संभाजीनगर मनपा को 15वें वित्त आयोग से मिलने वाले अनुदान पर संकट मंडरा सकता है। केंद्र सरकार के निर्धारित मानदंडों के अनुसार, संपत्ति कर की आय में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई तो मनपा को वित्त आयोग के अनुदान से वंचित होना पड़ सकता है।

वर्ष 2022-23 की तुलना में वर्ष 2023-24 में संपत्ति कर की आय में कम से कम 9.44 प्रतिशत वृद्धि होना अनिवार्य है। यह वृद्धि राज्य के पिछले पांच वर्षों की औसत सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) वृद्धि दर के बराबर अथवा उससे अधिक होनी चाहिए। ऐसे में मनपा प्रशासन के सामने संपत्ति कर की वसूली बढ़ाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

कर आय बढ़ाने से जुड़ी अनुदान की शर्त

राज्य की महानगरपालिकाओं, नगरपालिकाओं, नगर पंचायतों और छावनी बोर्डों को 15वें वित्त आयोग के माध्यम से विभिन्न विकास कार्यों के लिए अनुदान दिया जाता है। नगर विकास विभाग के माध्यम से यह राशि स्थानीय निकायों को वितरित की जाती है। विकास कार्यों के अलावा सरकारी योजनाओं में स्थानीय निकाय का हिस्सा देने और ऋण की अदायगी के लिए भी इस निधि का उपयोग किया जाता है।

केंद्र सरकार ने स्थानीय निकायों को केवल सरकारी अनुदान पर निर्भर रहने के बजाय अपने स्वयं के राजस्व स्रोत मजबूत करने के उद्देश्य से अनुदान को कर आय की वृद्धि से जोड़ दिया है। इसलिए निर्धारित वृद्धि दर हासिल करना मनपा के लिए आवश्यक हो गया है।

पांच लाख से अधिक संपत्तियां, आय 162 करोड़

मनपा क्षेत्र में पांच लाख से अधिक संपत्तियां दर्ज हैं। इसके बावजूद संपत्ति कर से होने वाली आय करीब 162 करोड़ रुपए ही है। संपत्तियों की संख्या और संभावित कर राजस्व को देखते हुए आय बढ़ाने की काफी गुंजाइश है। इसके बावजूद कर वसूली में अपेक्षित तेजी नहीं आने से मनपा की आर्थिक स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। प्रशासन को अब कर के दायरे से बाहर रह गई संपत्तियों की पहचान, लंबित कर की वसूली और संपत्ति कर निर्धारण में मौजूद त्रुटियों को दूर करने पर विशेष ध्यान देना होगा।

9.44 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य पूरा करना जरूरी

नगर विकास विभाग ने 15वें वित्त आयोग के अनुदान के लिए केंद्र सरकार के मानदंडों का पालन करने के निर्देश दिए हैं। इसके अनुसार वर्ष 2023-24 में संपत्ति कर की आय में पिछले वर्ष की तुलना में कम से कम 9.44 प्रतिशत वृद्धि आवश्यक है। यदि मनपा इस लक्ष्य को पूरा करने में विफल रहती है तो केंद्र से मिलने वाले अनुदान पर असर पड़ सकता है।

विकास कार्यों पर पड़ सकता है असर

15वें वित्त आयोग से मिलने वाली राशि मनपा के लिए महत्वपूर्ण राजस्व स्रोत है। इस राशि से शहर में विभिन्न विकास कार्य किए जाते हैं। साथ ही सरकारी योजनाओं में मनपा का हिस्सा देने और ऋण चुकाने के लिए भी निधि का उपयोग किया जाता है। ऐसे में अनुदान में कटौती या इसके रुकने से मनपा के विकास कार्यों और आर्थिक नियोजन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

इस स्थिति को देखते हुए मनपा प्रशासन को संपत्ति कर वसूली अभियान तेज करने, बकायेदारों पर कार्रवाई करने और अधिक से अधिक संपत्तियों को कर के दायरे में लाने की दिशा में तत्काल कदम उठाने होंगे। निर्धारित 9.44 प्रतिशत वृद्धि हासिल करना अब केवल राजस्व बढ़ाने का लक्ष्य नहीं, बल्कि वित्त आयोग के अनुदान को सुरक्षित रखने की अनिवार्य शर्त बन गया है।

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