Chhatrapati Sambhajinagar Five Tanks Clean Drinking Water: छत्रपति संभाजीनगर में नई जलापूर्ति योजना के तहत नक्षत्रवाड़ी से हनुमान टेकड़ी के बीच बिछाई गई 1,100 मिमी पाइपलाइन की सफाई शुरू हो गई है।
सफाई के लिए तीन स्थानों पर पानी छोड़ा जा रहा है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद पांच टंकियों में पानी भरकर संबंधित क्षेत्रों में जलापूर्ति की जाएगी।
छत्रपति संभाजीनगर शहर की नई जलापूर्ति योजना के तहत नक्षत्रवाड़ी से हनुमान टेकड़ी के बीच बिछाई गई 1,100 मिमी व्यास की नई पाइपलाइन की सफाई का काम शुरू कर दिया गया है। पाइपलाइन के अंदर जमा गंदगी और अन्य अवशेष बाहर निकालने के लिए सिद्धार्थ उद्यान के नाले, पदमपुरा वॉकिंग प्लाजा और पनचक्की परिसर में पानी छोड़ा जा रहा है। सफाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसी पाइपलाइन के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों की पानी की टंकियों को भरने का काम शुरू किया जाएगा।
सिद्धार्थ उद्यान के नाले समेत अन्य स्थानों पर पाइपलाइन से पानी छोड़े जाने के कारण सोशल मीडिया पर पानी बर्बाद किए जाने की चर्चा शुरू हो गई थी। इसके बाद जलापूर्ति विभाग से संपर्क करने पर अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पानी किसी तरह की बर्बादी के लिए नहीं, बल्कि नई पाइपलाइन की सफाई प्रक्रिया के तहत छोड़ा जा रहा है।
विभाग के अनुसार, संबंधित पाइपलाइन को पानी से भरने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। पाइप के अंदर जमा गंदगी को बाहर निकालने के लिए तीन स्थानों पर आउटलेट बनाए गए हैं। इन आउटलेट के माध्यम से पानी बाहर निकाला जा रहा है।
जलापूर्ति विभाग की ओर से पाइपलाइन से निकलने वाले पानी की गुणवत्ता और उसमें मौजूद गंदगी के स्तर की जांच की जा रही है। विभाग के अनुसार, गंदगी का स्तर 5 प्रतिशत तक पहुंचने के बाद पानी को निर्धारित आउटलेट से बाहर छोड़ा गया।
अधिकारियों के अनुसार, पाइपलाइन की सफाई के दौरान गंदगी का स्तर घटकर 3 प्रतिशत तक आने के बाद ही पानी को उपयोग में लाया जा सकेगा। इसके लिए पानी की गुणवत्ता की निगरानी लगातार की जा रही है।
छत्रपति संभाजीनगर शहर की सफाई प्रक्रिया पूरी होने और पानी उपयोग योग्य होने के बाद नई पाइपलाइन के माध्यम से नक्षत्रवाड़ी की नई पानी की टंकी, हिंदुस्तान आवास तथा जुबली पार्क की नई और पुरानी टंकियों में पानी भरा जा सकेगा।
इन टंकियों में पानी उपलब्ध होने के बाद संबंधित क्षेत्रों में जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। नई पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचने से इन क्षेत्रों में जलापूर्ति का दबाव कम करने और व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।