Sambhajinagar Municipal Corporation: छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका के कामकाज और वित्तीय व्यवस्था की निगरानी पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। महानगरपालिका के कुल 52 विभागों में से करीब 10 से 12 विभागों का पिछले पांच से दस वर्षों से लेखा परीक्षण ही नहीं हुआ है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, अग्निशमन, संपत्ति, यांत्रिकी, पशुपालन, जलापूर्ति और लेखा जैसे महत्वपूर्ण विभाग शामिल हैं।
यांत्रिकी विभाग का लेखा परीक्षण तो वर्ष 1995 के बाद से नहीं हुआ है। यह जानकारी मंगलवार को स्थायी समिति की बैठक में सामने आने के बाद सदस्यों ने प्रशासन को जमकर घेरा। पिछले सप्ताह स्थगित की गई स्थायी समिति की बैठक मंगलवार को सभापति अनिल मकरिये की अध्यक्षता में पूरी हुई। बैठक में लेखा परीक्षण के मुद्दे पर माधुरी अदवंत, सुरेंद्र कुलकर्णी और राजगौरव वानखेडे ने मुख्य लेखा परीक्षक शिवाजी नाईकवाडे से जवाब मांगे। सदस्यों ने सवाल किया कि महानगरपालिका में कुल कितने विभाग हैं और इनमें से कितने विभागों का नियमित लेखा परीक्षण हुआ है।
नाईकवाडे ने महानगरपालिका में कुल 52 विभाग होने की जानकारी दी। इसके बाद जब विभागवार लेखा परीक्षण की स्थिति पूछी गई तो यांत्रिकी विभाग का वर्ष 1995 से लेखा परीक्षण नहीं होने की जानकारी सामने आई। यह सुनते ही सदस्यों ने हैरानी जताते हुए इसे गंभीर और चिंताजनक स्थिति बताया।
मुख्य लेखा परीक्षक नाईकवाडे की ओर से कई विभागों के मूल प्रमाणक, संचिकाएं और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने का कारण बताया गया। वर्ष 2025-26 की रिपोर्ट में भी दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने और वर्ष 2024-25 की कई प्रविष्टियां हाथ नहीं लगने की जानकारी दी गई। इस जवाब से सदस्य संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने मुख्य लेखा परीक्षक को सवालों के घेरे में लिया।
इसके बाद सदस्यों ने स्पष्ट रूप से पूछा कि आखिर कितने विभागों का लेखा परीक्षण कई वर्षों से लंबित है। दबाव बढ़ने पर सामने आया कि स्वास्थ्य, अग्निशमन, संपत्ति, लेखा, उद्यान, पशुपालन, जलापूर्ति, शिक्षा, खेल, सूचना एवं जनसंपर्क, महिला एवं बाल विकास, सिद्धार्थ उद्यान के जलतरण केंद्र तथा विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयों का भी निर्धारित अवधि में लेखा परीक्षण नहीं हुआ है।
वर्षों से लेखा परीक्षण नहीं होने की जानकारी सामने आने पर स्थायी समिति के सदस्यों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। सदस्यों ने पूछा कि जब महत्वपूर्ण विभागों के कामकाज और खर्च की जांच ही समय पर नहीं हो रही है तो वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित होगी।
आयुक्त अमोल येडगे ने कहा कि लेखा परीक्षण से संबंधित कानून के अनुसार संबंधित विभागों से आवश्यक जानकारी लेकर प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए। यदि किसी विभाग के अधिकारी अथवा संबंधित परीक्षक को जानकारी मांगने के बावजूद जवाब नहीं मिलता है तो इसकी जानकारी आयुक्त के संज्ञान में लानी चाहिए। उन्होंने महत्वपूर्ण विभागों का प्राथमिकता क्रम तय कर पहले उनका लेखा परीक्षण करने के निर्देश दिए।
आयुक्त ने यह भी कहा कि आवश्यकता होने पर विशेषज्ञों और सेवानिवृत्त अधिकारियों की सहायता ली जा सकती है, ताकि वर्षों से लंबित लेखा परीक्षण की प्रक्रिया को गति दी जा सके। सभापति अनिल मकरिये ने अगली स्थायी समिति की बैठक में लेखा परीक्षण का समयबद्ध कार्यक्रम प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
बैठक में हर्सूल क्षेत्र में अनधिकृत भूखंड निर्माण के मामले में अब तक मामले दर्ज नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाया गया। वहीं, सत्तारूढ़ सदस्यों ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान कुछ नगरसेवकों द्वारा संबंधित विभाग के अधिकारियों को फोन कर कार्रवाई का विरोध करने का मुद्दा उठाया।
सदस्यों ने कहा कि एक ओर अतिक्रमण विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जाते हैं और दूसरी ओर कार्रवाई के समय उसी विभाग पर दबाव बनाया जाता है। इस दोहरे रवैये पर सदस्यों ने नाराजगी जताई। हाथगाड़ियों को लेकर स्पष्ट नीति बनाने के निर्देश भी आयुक्त अमोल येडगे ने दिए। बैठक में यह भी तय किया गया कि भविष्य में हाथगाड़ियों के नियमन और कार्रवाई को लेकर एक स्पष्ट नीति तैयार की जाए।