धाराशिव में सबसे ज्यादा 62.53% मतदान दर्ज।
छत्रपति संभाजीनगर में सबसे कम 55.73% मतदाताओं ने वोट डाला।
परभणी में 61.81% और हिंगोली में 61.58% मतदान।
वर्ष 2020 के चुनाव के मुकाबले मतदान में गिरावट।
चुनाव में कुल 41 प्रत्याशी मैदान में हैं; मतगणना 27 अक्टूबर को होगी।
Marathwada Graduate Constituency Election Voter Turnout: मराठवाड़ा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में मतदान प्रतिशत पिछले चुनाव की तुलना में घटा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, धाराशिव में सर्वाधिक 62.53% और छत्रपति संभाजीनगर में सबसे कम 55.73% मतदान दर्ज किया गया। अब सभी की नजरें 27 अक्टूबर को होने वाली मतगणना पर हैं।
छत्रपति संभाजीनगर, स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में मतदान प्रतिशत में आई गिरावट ने राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों की उत्सुकता बढ़ा दी है। शुक्रवार, 23 अक्टूबर को संपन्न मतदान में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, संभाग के आठ जिलों में मतदान का औसत करीब 59.48% बताया गया है। वर्ष 2020 के चुनाव में लगभग 64.8% मतदान हुआ था। इस बार मतदान में करीब पांच प्रतिशत अंक की गिरावट दर्ज होने की बात कही जा रही है।
इस चुनाव में कुल 41 प्रत्याशी मैदान में हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि मतदान में आई कमी का चुनावी नतीजों पर कितना असर पड़ेगा। हालांकि, कम या ज्यादा मतदान अपने आप में किसी प्रत्याशी की जीत या हार का संकेत नहीं होता। मतदाताओं के रुझान की वास्तविक तस्वीर 27 अक्टूबर को होने वाली मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगी।
आठ जिलों के उपलब्ध आंकड़ों में धाराशिव जिले में सबसे अधिक 62.53% मतदान दर्ज किया गया। परभणी में 61.81% और हिंगोली में 61.58% मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।
इसके विपरीत, छत्रपति संभाजीनगर जिले में मतदान का प्रतिशत केवल 55.73% रहा। लातूर में 56.45% मतदान दर्ज होने की जानकारी दी गई है। अन्य जिलों में मतदान का प्रतिशत इस प्रकार बताया गया है:
जालना: 59.81%
नांदेड: 59.81%
बीड: 59.67%
जिला स्तर पर आंकड़ों में अंतर से स्पष्ट है कि सभी क्षेत्रों में मतदाताओं की भागीदारी एक जैसी नहीं रही। कुछ जिलों में मतदान 60% से ऊपर रहा, जबकि छत्रपति संभाजीनगर और लातूर में यह इससे कम दर्ज किया गया।
वर्ष 2020 के चुनाव में मराठवाड़ा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कुल 3,73,166 मतदाता थे। इनमें से 2,41,908 मतदाताओं ने मतदान किया था। इन आंकड़ों के आधार पर मतदान प्रतिशत करीब 64.83% बनता है।
इस बार उपलब्ध जानकारी में औसत मतदान 59.48% बताया गया है। इससे पिछले चुनाव की तुलना में लगभग पांच प्रतिशत अंक की कमी दिखाई देती है। हालांकि, मतदान में गिरावट के पीछे के कारणों का स्पष्ट निष्कर्ष केवल इन आंकड़ों के आधार पर नहीं निकाला जा सकता।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में शिक्षित मतदाताओं की भागीदारी महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस बार मतदान में कमी और विभिन्न जिलों में दर्ज अलग-अलग प्रतिशत के बीच प्रत्याशियों की स्थिति को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों को अब मतगणना का इंतजार है। 27 अक्टूबर को सामने आने वाले नतीजों से ही स्पष्ट होगा कि मतदान के रुझान का चुनावी परिणाम पर क्या असर पड़ा।