मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना 2.0 के तहत महावितरण ने 1000 मेगावाट-घंटे की बैटरी भंडारण क्षमता हासिल की।
राज्य में 50 स्थानों पर 10-10 मेगावाट क्षमता के बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट शुरू।
अतिरिक्त सौर ऊर्जा को बैटरियों में संग्रहित कर शाम की अधिक मांग के समय इस्तेमाल किया जाएगा।
राज्य में करीब 7,000 मेगावाट क्षमता की विकेंद्रित सौर परियोजनाएं शुरू हो चुकी हैं।
महावितरण के अनुसार, इस व्यवस्था का लाभ सभी बिजली उपभोक्ताओं को मिलेगा।
Chhatrapati Sambhajinagar MSEDCL Solar Agriculture Feeder Scheme: महावितरण ने मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना 2.0 के तहत 1000 मेगावाट-घंटे की बैटरी भंडारण क्षमता का लक्ष्य हासिल किया है। राज्य में 50 स्थानों पर बैटरी स्टोरेज परियोजनाएं शुरू की गई हैं। दिन में पैदा होने वाली अतिरिक्त सौर बिजली को बैटरियों में जमा कर शाम के समय बिजली की अधिक मांग के दौरान इस्तेमाल किया जाएगा।
छत्रपति संभाजीनगर, दिन में पैदा होने वाली अतिरिक्त सौर ऊर्जा को अब शाम के समय बिजली की अधिक मांग के दौरान इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसके लिए महावितरण ने विकेंद्रित व्यवस्था के तहत बैटरी में बिजली संग्रहित करने की परियोजनाएं शुरू की हैं। मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना 2.0 के तहत कंपनी ने 1000 मेगावाट-घंटे (MWh) की बैटरी भंडारण क्षमता हासिल कर ली है।
महावितरण के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक तथा मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव लोकेश चंद्र ने बताया कि देश में पहली बार विकेंद्रित व्यवस्था के तहत बैटरियों का इस्तेमाल कर इतने बड़े पैमाने पर बिजली उपलब्ध कराने की पहल की गई है। राज्य में सूखे जैसी स्थिति के कारण बिजली की मांग बढ़ने पर यह व्यवस्था उपयोगी साबित हो रही है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पहल पर राज्य में मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना 2.0 लागू की जा रही है। इसके तहत अब तक करीब 7,000 मेगावाट क्षमता की विकेंद्रित सौर ऊर्जा परियोजनाएं शुरू हो चुकी हैं। इन परियोजनाओं से पैदा होने वाली बिजली का उपयोग कृषि पंपों को दिन में आपूर्ति करने के लिए किया जाता है।
कृषि पंपों की जरूरत पूरी होने के बाद बचने वाली अतिरिक्त बिजली और ग्रिड के माध्यम से मिलने वाली सस्ती सौर ऊर्जा को बैटरियों में संग्रहित किया जा रहा है। शाम के समय जब बिजली की मांग बढ़ती है, तब इस संग्रहित ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे मांग के व्यस्त समय में बिजली उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
महावितरण के अनुसार, देश की बिजली वितरण कंपनियों में वह पहली ऐसी कंपनी बनी है, जिसने विकेंद्रित वितरण नेटवर्क से जुड़ी 1000 मेगावाट-घंटे क्षमता की बैटरी भंडारण परियोजनाएं शुरू की हैं। राज्य में कुल 50 स्थानों पर 10-10 मेगावाट क्षमता के बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं।
बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) योजना के तहत हाल ही में 500 मेगावाट क्षमता की अतिरिक्त बैटरी भंडारण व्यवस्था भी चालू की गई है। इस व्यवस्था से दो घंटे तक बिजली आपूर्ति की जा सकती है। इसके साथ ही कुल भंडारण क्षमता 1000 मेगावाट-घंटे तक पहुंच गई है।
महावितरण का कहना है कि सौर ऊर्जा को बैटरियों में संग्रहित करने की यह व्यवस्था नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर इस्तेमाल की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। दिन के समय उपलब्ध अतिरिक्त सौर बिजली को शाम के व्यस्त समय में उपयोग करने से बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाने में मदद मिलेगी। कंपनी के अनुसार, इस व्यवस्था का लाभ राज्य के सभी बिजली उपभोक्ताओं को मिलेगा।