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महावितरण ने सौर ऊर्जा से उत्पादित अतिरिक्त बिजली को संग्रहित करने के लिए 1000 मेगावाट घंटे की बैटरी क्षमता का लक्ष्य पूरा कर लिया है।
मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना 2।0 के तहत राज्य में लगभग 7000 मेगावाट क्षमता की विकेंद्रित सौर ऊर्जा परियोजनाएं शुरू हो चुकी हैं।
दिन में अतिरिक्त उत्पादित सौर बिजली बैटरी में जमा की जाएगी और शाम के समय बिजली की मांग बढ़ने पर इसका उपयोग किया जाएगा।
Akola Electricity Demand: मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना 2.0 के तहत सौर ऊर्जा परियोजनाओं से मिलने वाली अतिरिक्त बिजली को बैटरी में संग्रहित कर शाम के समय बिजली की अधिक मांग के दौरान उपयोग करने के लिए महावितरण ने 1000 मेगावाट घंटे की क्षमता का लक्ष्य हासिल किया है।
देश में पहली बार विकेंद्रित बिजली वितरण व्यवस्था से जुड़ी बैटरी परियोजनाओं के माध्यम से इतने बड़े पैमाने पर बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। राज्य में सूखे जैसी स्थिति और बढ़ती गर्मी के कारण बिजली की मांग बढ़ने के बीच यह व्यवस्था राहत देने वाली साबित हो रही है। यह जानकारी मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव तथा महावितरण के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक लोकेश चंद्र ने दी।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पहल पर राज्य में मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना 2.0 लागू की जा रही है। इसके तहत अब तक लगभग 7000 मेगावाट क्षमता की विकेंद्रित सौर ऊर्जा परियोजनाएं शुरू हो चुकी हैं। इन परियोजनाओं से उत्पादित बिजली कृषि पंपों को दिन में उपलब्ध कराई जाती है।
अतिरिक्त बिजली को बैटरी में संग्रहित कर शाम को बिजली की अधिक मांग के समय उपयोग करने के लिए बैटरी ऊर्जा संग्रहण प्रणाली (बीईएसएस) शुरू की गई है। इस योजना के तहत 500 मेगावाट क्षमता की बैटरी संग्रहण व्यवस्था हाल ही में शुरू की गई है। इससे दो घंटे तक बिजली की आपूर्ति संभव है। इस प्रकार कुल 1000 मेगावाट घंटे की क्षमता उपलब्ध हुई है।
महावितरण ने कुल 750 मेगावाट क्षमता की बैटरी संग्रहण परियोजनाएं स्थापित करने की योजना शुरू की है। इससे दो घंटे के लिए 750 मेगावाट बिजली उपलब्ध होगी, यानी कुल 1500 मेगावाट घंटे की क्षमता तैयार होगी। इसमें से 1000 मेगावाट घंटे का काम पूरा हो चुका है, जबकि शेष कार्य दिसंबर के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है। इसके अलावा 4000 मेगावाट घंटे क्षमता की अन्य परियोजनाओं का काम भी प्रगति पर है।
राज्य में 50 - स्थानों पर 10-10 मेगावाट क्षमता की बैटरी संग्रहण परियोजनाएं शुरू की गई हैं। इन परियोजनाओं से शाम के समय बिजली की अधिक मांग पूरी करने के साथ बाजार दरों की तुलना में कम कीमत पर बिजली उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। आगामी गर्मियों में इस व्यवस्था का सबसे अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
एल नीनों के प्रभाव से बारिश कम होने के कारण अक्टूबर में गर्मी अधिक महसूस की जा रही है। इससे बिजली की मांग भी बढ़ गई है। दिन में सौर ऊर्जा से पर्याप्त और किफायती बिजली उपलब्ध होती है, लेकिन शाम को सौर ऊर्जा का उत्पादन बंद होने के बाद बिजली की आपूर्ति के लिए महंगी दरों पर बिजली खरीदनी पड़ती है। ऐसे में बैटरी संग्रहण परियोजनाओं से शाम के समय बिजली उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। इसका लाभ सभी श्रेणियों के बिजली उपभोक्ताओं को मिलने की उम्मीद है।