जिले के 97 गांवों और 27 बस्तियों में 170 निजी टैंकरों से पानी पहुंचाया जा रहा है।
अब तक 70 कुओं का अधिग्रहण किया गया है; वैजापुर, गंगापुर और पैठण पर विशेष ध्यान रहेगा।
प्रशासन ग्राम पंचायतवार जलापूर्ति योजना बनाएगा और टैंकरों की नियमित निगरानी करेगा।
Drought Water Crisis And Tanker Supply Plan: छत्रपति संभाजीनगर जिले में सूखे की गंभीर स्थिति को देखते हुए संभावित जलसंकट से निपटने के लिए प्रशासन ने तैयारियां तेज करने के निर्देश दिए हैं।
जिलाधिकारी विनय गौड़ा जी. सी. ने सभी गांवों की जलापूर्ति व्यवस्था का सूक्ष्म आकलन कर ग्राम पंचायतवार कार्ययोजना तत्काल तैयार करने का आदेश दिया है। इसमें कुओं का अधिग्रहण, गहरीकरण, बोरवेल तथा अस्थायी जलापूर्ति योजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
टैंकरों से पानी की आपूर्ति केवल अत्यंत आवश्यक परिस्थितियों में की जाए। टैंकरों के संचालन और जल वितरण पर नियमित निगरानी रखने के लिए जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष स्थापित किया जाएगा।
जिले में जलापूर्ति योजनाओं और सूखे की स्थिति की समीक्षा के लिए बुधवार को आयोजित बैठक में जिलाधिकारी गौड़ा ने अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि नागरिकों को पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
संभावित संकट को देखते हुए अंतिम समय का इंतजार करने के बजाय अभी से प्रभावी उपाय किए जाएं। बैठक में बताया गया कि वर्तमान में जिले के 97 गांवों और 27 बस्तियों में 170 निजी टैंकरों के माध्यम से पानी पहुंचाया जा रहा है।
इनमें गंगापुर तहसील में सर्वाधिक 67 टैंकर चल रहे हैं। पैठण में 49, वैजापुर में 28, छत्रपति संभाजीनगर तहसील में 16 और फुलंब्री में 10 टैंकरों से जलापूर्ति की जा रही है।
जिले में अब तक 70 कुओं का अधिग्रहण किया गया है। इनमें से 60 कुओं का उपयोग टैंकरों में पानी भरने के लिए, जबकि 10 कुओं का उपयोग टैंकरों के अतिरिक्त अन्य माध्यमों से जलापूर्ति के लिए किया जा रहा है।
जिलाधिकारी ने कहा कि प्रत्येक गांव में उपलब्ध जलस्रोतों, पानी की मांग और संभावित कमी का आकलन कर ग्राम पंचायतवार कार्ययोजना बनाई जाए। इसके लिए समूह विकास अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
जल जीवन मिशन के अंतर्गत चल रहे कार्यों को गति देकर शीघ्र पूरा किया जाए। खराब जलापूर्ति योजनाओं की मरम्मत, अस्थायी पाइपलाइन बिछाने, कुओं के अधिग्रहण और गहरीकरण जैसे उपाय प्राथमिकता से किए जाएं।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि टैंकरों से पानी पहुंचाने वाले गांवों का संबंधित अधिकारी स्वयं निरीक्षण करें। टैंकरों के फेरों, पानी की मात्रा, आपूर्ति के समय और वितरण व्यवस्था की नियमित जांच की जाए। वैजापुर, गंगापुर और पैठण तहसीलों में जलसंकट की स्थिति पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है। पानी का अनधिकृत दोहन रोकने के लिए भी आवश्यक कदम उठाए जाएं।
ग्राम राजस्व अधिकारियों, समूह विकास अधिकारियों और जलापूर्ति विभाग के अभियंताओं को सप्ताह में कम से कम दो दिन जलसंकटग्रस्त गांवों का संयुक्त निरीक्षण करना होगा। स्थानीय जलस्रोतों की उपलब्धता जांचकर आवश्यक उपाय तय किए जाएं। टैंकर शुरू करने से पहले अन्य सभी वैकल्पिक व्यवस्थाओं की पड़ताल भी अनिवार्य होगी।
बैठक में किसानों को सरकारी सहायता उपलब्ध कराने के विषय पर भी चर्चा हुई। जिलाधिकारी विनय गौडा जी. सी. ने फसल और अन्य नुकसान के आकलन संबंधी पंचनामों की अंतिम रिपोर्ट निर्धारित मानकों के अनुसार तैयार करने के निर्देश दिए।
पात्र किसानों की सूचियां अद्यतन रखने और शासन से प्राप्त सूचियों का सत्यापन करने को कहा गया। संबंधित अधिकारियों को दो से तीन दिनों के भीतर अंतिम रिपोर्ट जिलाधिकारी कार्यालय में जमा करनी होगी।
जिलाधिकारी ने कहा कि अस्थायी उपायों के साथ दीर्घकालीन जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत करना भी आवश्यक है। तहसीलदारों, समूह विकास अधिकारियों और जलापूर्ति अभियंताओं को नियमित समन्वय बैठकें लेकर उपायों की समीक्षा करनी होगी।
प्रशासन के सभी विभाग मिलकर काम करें, ताकि नागरिकों को पेयजल के लिए परेशानी न उठानी पड़े और सूखे से प्रभावित किसानों को सरकारी सहायता समय पर मिल सके।
बैठक में निवासी उपजिलाधिकारी जनार्दन विधाते, पैठण की उपविभागीय अधिकारी नीलम बाफना, कन्नड़ के उपविभागीय अधिकारी संतोष गोरड, छत्रपति संभाजीनगर के तहसीलदार शिवानंद बिडवे, वैजापुर के तहसीलदार सुनील सावंत, जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी मिन्नू पी. एम. तथा अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी वासुदेव सोलंके सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
विभिन्न तहसीलों के अधिकारी और समूह विकास अधिकारी दूरदृश्य प्रणाली के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।