संभाजीनगर: महाराष्ट्र सोलर पावर सेविंग्स सोर्स: सोशल मीडिया
महाराष्ट्र

महाराष्ट्र में बिजली की मांग 38,021 मेगावाट तक पहुंची, सौर ऊर्जा से 384 करोड़ की बचत

Maharashtra Solar Power Savings: महाराष्ट्र में 10 अक्टूबर को बिजली की मांग 38,021 मेगावाट तक पहुंची। सौर कृषि वाहिनी और सूर्यघर योजना से 5,100 मेगावाट योगदान मिला, बिजली खरीद में 384cr की बचत हुई।

मनीषा बोंदरे

Highlights

  • 10 अक्टूबर को राज्य में बिजली की मांग 38,021 मेगावाट तक पहुंचने की जानकारी।

  • सौर कृषि वाहिनी और प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना से 5,100 मेगावाट बिजली का योगदान।

  • बिजली खरीद में 384 करोड़ रुपये की बचत होने का दावा।

  • सौर कृषि वाहिनी योजना के तहत अब तक 7,000 मेगावाट क्षमता के प्रकल्प शुरू।

  • करीब 11 लाख उपभोक्ताओं ने घरों की छतों पर सौर ऊर्जा प्रकल्प लगाए।

Sambhajinagar Mukhyamantri Saur Krushi Vahini Yojana Power Savings Maharashtra: कम बारिश और एल नीनो के प्रभाव के बीच अक्टूबर में महाराष्ट्र की बिजली मांग बढ़ गई। 10 अक्टूबर को मांग 38,021 मेगावाट तक पहुंचने की जानकारी दी गई। महावितरण के अनुसार, सौर कृषि वाहिनी और प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना से मिले 5,100 मेगावाट के योगदान से बिजली आपूर्ति में मदद मिली और बिजली खरीद में 384 करोड़ रुपये की बचत हुई।

बिजली की मांग बढ़ी, सौर ऊर्जा से राहत

छत्रपति संभाजीनगर, कम वर्षा और एल नीनो के प्रभाव के चलते अक्टूबर में बढ़ी गर्मी के बीच महाराष्ट्र में बिजली की मांग में तेजी दर्ज की गई। 10 अक्टूबर को राज्य में बिजली की मांग 38,021 मेगावाट तक पहुंचने की जानकारी दी गई है। इस दौरान सौर ऊर्जा परियोजनाओं के योगदान से बिजली की जरूरत पूरी करने में मदद मिली और बिजली खरीद में 384 करोड़ रुपये की बचत होने की बात सामने आई है।

महावितरण के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक लोकेश चंद्र के अनुसार, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पहल पर शुरू की गई मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना के तहत किसानों को दिन के समय कृषि पंपों के लिए बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से भी राज्य की बिजली व्यवस्था को सहायता मिल रही है।

5,100 मेगावाट बिजली का योगदान

सौर कृषि वाहिनी और प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के माध्यम से स्थानीय स्तर पर करीब 5,100 मेगावाट बिजली उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है। इससे बढ़ती मांग के बीच बिजली आपूर्ति बनाए रखने और महंगी बिजली खरीदने की जरूरत कम करने में मदद मिली।

महावितरण के अनुसार, राज्य के सभी 48 लाख कृषि पंपों को सौर ऊर्जा से चलाने के उद्देश्य से 16,000 मेगावाट क्षमता के सौर प्रकल्प स्थापित किए जा रहे हैं। इनमें से अब तक करीब 7,000 मेगावाट क्षमता के प्रकल्प शुरू हो चुके हैं। वर्तमान में लगभग 80 प्रतिशत कृषि पंपों को दिन के समय बिजली मिल रही है।

सस्ती बिजली से खरीद खर्च में कमी

सौर कृषि वाहिनी योजना के तहत औसतन 3.09 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली उपलब्ध होने से महंगी बिजली खरीदने की आवश्यकता कम हुई है। सितंबर महीने में इस योजना से 878 मिलियन यूनिट बिजली उपलब्ध कराई गई। इससे बिजली आपूर्ति को सहारा मिलने के साथ खरीद खर्च में बचत करने में भी मदद मिली।

छतों पर सौर ऊर्जा लगाने का बढ़ा चलन

राज्य में घरेलू स्तर पर भी सौर ऊर्जा का उपयोग बढ़ रहा है। छतों पर लगाए गए सौर ऊर्जा प्रकल्पों की कुल क्षमता 7,175 मेगावाट तक पहुंचने की जानकारी दी गई है। करीब 11 लाख बिजली उपभोक्ताओं ने अपने घरों की छतों पर सौर ऊर्जा प्रकल्प लगाए हैं।

बढ़ती बिजली मांग के बीच कृषि और घरेलू स्तर पर सौर ऊर्जा का यह योगदान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पारंपरिक स्रोतों से बिजली खरीदने का दबाव कम करने और उपभोक्ताओं को राहत देने में मदद मिल सकती है।

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