Tadoba Andhari Tiger Reserve: बाघों के मुक्त विचरण और समृद्ध जैवविविधता के कारण ताडोबा-अंधारी व्याघ्र प्रकल्प देश-विदेश के पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गया है। वर्षभर में करीब 4.50 लाख पर्यटकों ने ताडोबा का भ्रमण किया, जिनमें लगभग 15 हजार विदेशी पर्यटक शामिल हैं। बाघों के साथ तेंदुआ, भालू, सांभर, हिरण, जंगली सुअर, गौर और विविध पक्षी व वन्यजीव पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं।
ताडोबा में करीब 183.25 किमी सफारी मार्ग हैं। मोहर्ली, कोलारा, खुटवंडा, नवेगांव, पांगडी और झरी सहित विभिन्न प्रवेशद्वारों से पर्यटक जंगल सफारी का आनंद लेते हैं। स्थानीय प्रशिक्षित प्रकृति मार्गदर्शक भी पर्यटन व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सफारी जीप, चालक, प्रकृति मार्गदर्शक, होटल, रिसॉर्ट, होम-स्टे, भोजन व अन्य पर्यटन व्यवसायों से स्थानीयों को रोजगार मिल रहा है।
पर्यटन के बढ़ते दायरे से स्थानीय युवाओं के लिए भी रोजगार के नए अवसर निर्माण हो रहे हैं। हालांकि, बढ़ते पर्यटन के साथ वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन के बीच संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है। जंगल में कचरा न फेंकना, वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी रखना, निर्धारित मार्ग व समय का पालन करना और तेज आवाज से बचना पर्यटकों के लिए आवश्यक है।
ताडोबा-अंधारी व्याघ्र प्रकल्प प्रकल्प संचालक डॉ. प्रभूनाथ शुक्ला ने कहा कि ताडोबा की पहचान केवल बाघों के दर्शन से नहीं, बल्कि संपूर्ण जैवविविधता से है। पर्यटन बढ़ाते समय वन्यजीवों और उनके अधिवास पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े, इसे प्राथमिकता दी जा रही है। स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ाकर रोजगार और संरक्षण दोनों को मजबूत करने का प्रयास है।