Manikgarh Cement Company: चंद्रपुर जिले के राजुरा तहसील के नोकारी (बु।), कुसुंबी, लिंगनडोह और आसापुर गांवों को जोड़ने वाले सार्वजनिक निस्तार मार्ग पर माणिकगढ़ सीमेंट कंपनी द्वारा लोहे का गेट लगाकर रास्ता बंद किए जाने का आरोप आदिवासी किसानों और ग्रामीणों ने लगाया है। उनका कहना है कि वर्ष 1981 के लीज समझौते में यह स्पष्ट उल्लेख है कि संबंधित मार्ग सार्वजनिक रहेगा तथा उस पर किसी प्रकार का स्थायी निर्माण या अवरोध नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद गेट लगाकर लोगों की आवाजाही पर रोक लगाई गई है।
ग्रामीणों के अनुसार, कंपनी द्वारा बनाया गया अंडरपास बड़े वाहनों के आवागमन के लिए पर्याप्त नहीं है। इससे आसापुर की ओर जाने वाले वाहन चालकों और ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है तथा उनके निस्तार अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि इस संबंध में वर्ष 2019 में राजस्व विभाग से शिकायत की गई थी।
इसके बाद तत्कालीन तहसीलदार ने 7 जुलाई 2020 को आदेश जारी कर कंपनी को अपने परिवहन के लिए अलग आंतरिक मार्ग बनाने तथा सार्वजनिक निस्तार मार्ग को खुला रखने के निर्देश दिए थे। आरोप है कि अपील लंबित होने का हवाला देकर पिछले छह वर्षों से इस आदेश का प्रभावी पालन नहीं किया गया।
28 मई 2026 को मंडल अधिकारी चव्हाण और ग्राम राजस्व अधिकारी जाधव ने स्थल निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। वहीं जून 2026 में गडचांदूर के पुलिस निरीक्षक निरीक्षण के लिए पहुंचे तो उन्हें भी संबंधित मार्ग पर अवरोध का सामना करना पड़ा, ऐसा आंदोलनकारियों का दावा है।
4 अगस्त 2026 को राजुरा के तहसीलदार ओमप्रकाश गोंड ने उपविभागीय अभियंता प्रकाश कोरेगावडा, पुलिस निरीक्षक शिवाजी कदम, भूमि अभिलेख विभाग तथा राजस्व अधिकारियों के साथ मौके का निरीक्षण किया। इस दौरान गेट नंबर-3 पर ताला लगा होने की बात सामने आई।
आदिवासी किसानों ने कंपनी पर वन विभाग की पूर्व अनुमति के बिना वन कंपार्टमेंट क्रमांक 36 से भारी वाहनों के लिए मार्ग बनाने तथा बाम्बेजरी क्षेत्र में कोलाम समाज की सर्वे नंबर 47 और 48 की भूमि पर बिना भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया और मुआवजा दिए सड़क निर्माण करने का भी आरोप लगाया है।
ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी की बाड़बंदी और कथित अतिक्रमण से लगभग 100 एकड़ निजी एवं वन भूमि प्रभावित हुई है। उनका दावा है कि उपवन संरक्षक योगेश वाघाये ने मामले की जांच कर वन परिक्षेत्र अधिकारी को सर्वे कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
आंदोलनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि गांव में भ्रम की स्थिति पैदा करने के लिए कंपनी के आपूर्ति विभाग के एक कर्मचारी के माध्यम से माहौल प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों पर कंपनी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
निरीक्षण के दौरान तहसीलदार ओमप्रकाश गोंड, उपविभागीय अभियंता प्रकाश कोरेगावडा, पुलिस निरीक्षक शिवाजी कदम, भूमि अभिलेख विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, आंदोलनकारी आबिद अली, भीमा मडावी, भाऊराव कन्नाके, संतोष राठोड तथा राजस्व एवं पुलिस विभाग के अधिकारी मौजूद थे।
ग्रामीणों ने मांग की है कि सार्वजनिक निस्तार मार्ग तत्काल खोला जाए, 7 जुलाई 2020 के आदेश का पालन कराया जाए तथा कथित अतिक्रमण और वन भूमि के उपयोग की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की जाए। इन मांगों को लेकर आदिवासी किसान 6 अगस्त को कंपनी के गेट नंबर-1 के सामने शांतिपूर्ण आंदोलन करेंगे।