बाघ (सोर्स: सोशल मीडिया) 
चंद्रपुर

छोटा मटका को ताडोबा वापसी के लिए करना होगा इंतजार, गंभीर चोटों के कारण इलाज जारी

Chandrapur News: ब्रह्मा बाघ के साथ लड़ाई में घायल छोटा मटका (T126) की ताड़ोबा वापसी स्थगित, चंद्रपुर के TTC में इलाज चल रहा है। चोटों के कारण उसकी जंगल में वापसी की संभावना कम है।

आकाश मसने

Chhota Matka Tiger Injury: पूर्णिमा की रात ब्रह्मा (T158) बाघ को मारकर खुद को गंभीर रूप से घायल करने वाले ताड़ोबा राजा छोटा मटका (T126) की ताड़ोबा वापसी स्थगित कर दी गई है। पशु चिकित्सकों की एक विशेष टीम चंद्रपुर के ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर (TTC) में उसका इलाज कर रही है और फिलहाल छोटा मटका को ताडोबा जंगल में छोड़ने की संभावना कम है, ताडोबा बाघ परियोजना प्रबंधन ने जानकारी दी है।

बुद्ध पूर्णिमा की रात ताडोबा-अंधारी बाघ अभयारण्य के बफर जोन के अंतर्गत निमढेला निर्दिष्ट क्षेत्र, खडसंगी के उमरीखोरा क्षेत्र में दो बाघों, छोटा मटका और ब्रह्मा के बीच भीषण लड़ाई हुई। इस लड़ाई में ब्रह्मा बाघ की मौत हुई और छोटा मटका गंभीर रूप से घायल हो गया। उसके मुंह और पैर में गंभीर चोटें आईं।

पैर में गंभीर चोट के कारण वह ठीक से चल भी नहीं पा रहा था। इसके बाद से ताड़ोबा टाइगर रिजर्व प्रशासन ने छोटा मटका का प्राकृतिक उपचार शुरू किया था, लेकिन छोटा मटका की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ।

सोशल मीडिया का असर

पर्यावरणविदों और वन्यजीव प्रेमियों ने ताड़ोबा राजा छोटा मटका की जान बचाने के लिए गंभीर चिंता व्यक्त की और अक्सर जंगल में उसकी गतिविधियों के वीडियो साझा किए। सोशल मीडिया, मीडिया और वन्यजीव पर्यावरणविदों द्वारा छोटा मटका की जान बचाने को लेकर चिंता व्यक्त करने के बाद, मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने स्वयं छोटा मटका के स्वास्थ्य का संज्ञान लिया।

नागपुर पीठ में जनहित याचिका दायर की गई थी। न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति अजीत कडेथानकर के समक्ष सुनवाई के बाद, अधिवक्ता यश साम्ब्रे को मामले की जांच के लिए न्यायमित्र नियुक्त किया गया। अदालत के हस्तक्षेप के बाद, 27 अगस्त को ताड़ोबा-अंधारी बाघ अभयारण्य (बफर) के अंतर्गत खड़संगी वन क्षेत्र के कम्पार्टमेंट संख्या 51 से घायल छोटा मटका (T136) को बचाया गया और सफलतापूर्वक पकड़ लिया गया।

चंद्रपुर के ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर में इलाज जारी

छोटा मटका को चंद्रपुर के ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर (TTC) में लाया गया है। यहां, पशु चिकित्सकों की एक विशेषज्ञ टीम द्वारा उसकी गहन चिकित्सा जाँच की गई। इस दौरान पैथोलॉजिकल, हिस्टोलॉजिकल और रेडियोलॉजिकल जाँच की गई। शरीर पर कोई संक्रमण, मवाद, लार्वा या फोड़ा नहीं पाया गया, एक्स-रे रिपोर्ट में बाएं अगले पैर में गंभीर फ्रैक्चर का पता चला। बाघ के दांत भी क्षतिग्रस्त थे।

विशेषज्ञों के अनुसार, छोटा मटका को तुरंत जंगल में छोड़ना संभव नहीं है।ताड़ोबा बाघ अभयारण्य प्रबंधन ने सूचित किया है कि उसकी हड्डियों के फ्रैक्चर और दांतों की चोटों के इलाज के लिए उसे दीर्घकालिक चिकित्सा देखभाल और पुनर्वास की आवश्यकता है।

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