चंद्रपुर ग्रामीण अस्पताल  (सोर्सः सोशल मीडिया)
चंद्रपुर

चंद्रपुर के 18 गांवों के ग्रामीण अस्पताल में 2 ही डॉक्टर, तीन साल बाद हुआ था उद्घाटन, अब कर्मियों की कमी

Chandrapur Rural Hospital: चंद्रपुर जिले के ग्रामीण अस्पताल की तस्वीर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के महत्व को सामने लाती है। चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

आंचल लोखंडे

Highlights:

  • तस्वीर में चंद्रपुर जिले का ग्रामीण अस्पताल भवन दिखाई दे रहा है।

  • अस्पताल के प्रवेश द्वार के पास एंबुलेंस खड़ी दिखाई देती है।

  • अस्पताल ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

Chandrapur Health Services: 2023 में बन कर तैयार ग्रामीण अस्पताल को तीन वर्षों तक उद्घाटन के लिए लटकाए रखा गया। कलेक्टर ने मध्यस्थता की और सितंबर माह में 18 गांवों के लिए अनिवार्य ऐसे 30 बेडों के ग्रामीण अस्पताल का उद्घाटन भी हो गया। अब यहां एक पुरुष व एक महिला ऐसे दो ही चिकित्सक है। मेडिकल मशीनरी व उपकरणों का पता नहीं है। आवश्यक कर्मचारियों की गंभीर कमी के बीच यह चर्चित ग्रामीण अस्पताल ही जैसे सलाइन की कगार पर पहुंचने की जानकारी सामने आयी है।

चंद्रपुर जिले के घुग्घुस स्थित 30 बेड के ग्रामीण अस्पताल का लोकार्पण 19 सितंबर 2026 को हुआ था। लेकिन एक माह से अधिक समय बीतने के बाद भी अस्पताल में आवश्यक डॉक्टरों, कर्मचारियों और चिकित्सा मशीनरी की व्यवस्था नहीं हो सकी है। देश के अतिप्रदूषित शहरों में से एक घुग्घुस में 2023 में ही बन कर तैयार ग्रामीण अस्पताल का उद्घाटन तीन साल तक अटकने का कारण पीडब्ल्यूडी के तकनीकी विभाग की खामी बताई गयी।

जिलाधिकारी ने लगाई फटकार

नवभारत की खबर के बाद जिलाधिकारी ने प्रत्यक्ष मुआयना कर फटकार लगाई और अस्पताल उद्घाटन के लिए तैयार हो गया। पीडब्ल्यूडी को किसके निर्देश थे यह यद्यपी गुलदस्ते में है परंतु प्रशासन ने जनाक्रोश देखते हुए इसका उद्घाटन करा दिया। विकास के सपने दिखानेवाले भाषण हुए। प्रत्यक्ष एक माह बीत जाने के बाद यहां पर सेवा सुविधाओं का घना अंधेरा फैला है। इसकी शिकायत सीएम और डिप्टी सीएम से की गई है।

40 से अधिक प्रकार की होनी चाहिए सुविधाएं

बताया जाता है कि भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानक 2022 तथा राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार आयुष अधिकारी समेत 8 चिकित्सक व सर्जन की दरकार बताई जाती है। आपातकालीन विभाग, श्वसन सहायता, जांच विभाग, प्रयोगशाला, प्रसूति कक्ष, नवजात देखभाल, ऑपरेशन थिएटर, सामान्य वार्ड, दवा एवं नसबंदी, सहायक व्यवस्था को मिला कर 40 से अधिक प्रकार की मशीनें व -उपकरण सामग्री की आवश्यकता बताई जाती है।

सुविधाएं नहीं तो मरीजों को लाभ क्या ?

समाजसेवी इबादुल हसन सिद्दिकी ने कहा कि घुग्घुस शहर की आबादी लगभग 50 हजार है। इसके अलावा शहर से सटे 18 छोटे-बड़े गांवों के नागरिक भी उपचार के लिए इसी क्षेत्र पर निर्भर हैं। यहां बड़ी संख्या में कामगार और अन्य नागरिक रहते हैं, जिन्हें समय पर और बेहतर चिकित्सा सुविधा की आवश्यकता है। ऐसे में 30 बेड के ग्रामीण अस्पताल में पर्याप्त चिकित्सा स्टाफ और जरूरी उपकरणों की उपलब्धता बेहद जरूरी है। सुविधाएं नहीं होगी तो हमारी जद्दोजहद का क्या फायदा?

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