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चंद्रपुर जिले में आंगनवाड़ियों के बच्चों के लिए पोषण आहार तैयार करने वाली बचत समूहों की महिलाओं को फरवरी से भुगतान नहीं मिला है।
महिलाओं को प्रति लाभार्थी केवल 8 रुपये मिलते हैं और भुगतान में 8 से 10 महीने तक की देरी होने का आरोप है।
संगठन ने बकाया भुगतान तत्काल करने और प्रति लाभार्थी दर 8 रुपये से बढ़ाकर 15 रुपये करने की मांग की है।
Chandrapur Anganwadi Nutrition Food: आंगनवाड़ियों में 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को पोषण आहार उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी निभाने वाले बचत समूहों की महिलाओं पर आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। पोषण आहार आपूर्ति का भुगतान हर साल आठ से दस महीने तक लंबित रहता है।
इस वर्ष भी फरवरी से अब तक मेहनताना नहीं मिलने के कारण महिलाओं के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। शासन ने लंबित मांगों पर तत्काल निर्णय नहीं लिया, तो तीव्र आंदोलन छेड़ने की चेतावनी प्रा. रमेशचंद्र दहिवडे ने दी। बचत समूह आंगनवाड़ी पोषण आहार कर्मचारी संगठन की ओर से शनिवार को जनसंघर्ष भवन में आयोजित सम्मेलन में वे बोल रहे थे।
सम्मेलन की अध्यक्षता प्रभा बावणे ने की। इस अवसर पर अरुण भेलके उपस्थित थे। दहिवडे ने बताया कि बचत समूहों की महिलाएं बच्चों के लिए पोषण आहार तैयार करने हेतु इंधन, खाद्य तेल, दालें, मूंग, मटकी, मुरमुरे, मूंगफली, गुड़ और सब्जियां अपने खर्च से खरीदती हैं। सरकारी राशन दुकानों से अनाज लेकर भोजन तैयार करना, बच्चों को ताजा आहार परोसना, बर्तन साफ करना और बचे हुए खाद्य पदार्थों को सुरक्षित रखना भी उन्हीं की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद उन्हें प्रति लाभार्थी केवल 8 रुपए मिलते हैं। वह राशि भी महीनों तक अटकी रहती है, जिससे महिलाओं की आर्थिक परेशानी बढ़ रही है।
संगठन ने बकाया भुगतान तत्काल करने, शून्य से तीन वर्ष के बच्चों और स्तनपान कराने वाली माताओं के पोषण आहार की जिम्मेदारी भी बचत समूहों को सौंपने, लंबित अतिरिक्त एक हजार रुपये का भुगतान करने तथा प्रति लाभार्थी दर आठ से बढ़ाकर 15 रुपये करने की मांग की। इसके अलावा सेंट्रल किचन योजना रद्द करने, निश्चित मानधन हर महीने नियमित देने और न्यूनतम व समान वेतन लागू करने की मांग भी उठाई गई।
मांगों का ज्ञापन सौंपने के लिए अरुण भेलके के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी भागवत तांबे से मिलने का प्रयास किया। हालांकि, मुलाकात के दौरान अधिकारी की कथित टिप्पणी से प्रतिनिधिमंडल ने नाराजगी जताई। संगठन ने संबंधित अधिकारी के व्यवहार का निषेध करते हुए लोकसेवक के रूप में विनम्रता बरतने की मांग की। साथ ही, मांगों पर ध्यान नहीं दिए जाने पर भागवत हटाओ, आईसीडीएस बचाओ आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी।