वधावन में बनेगा सबसे बड़ा बंदरगाह (फोटो सौजन्यः सोशल मीडिया) 
महाराष्ट्र

महाराष्ट्र के वधावन में बनेगा सबसे बड़ा बंदरगाह, केंद्रीय कैबिनेट ने दी मंजूरी, 12 लाख लोगों को मिलेगा रोजगार

केंद्रीय कैबिनेट ने महाराष्ट्र के वधावन में हर मौसम में इस्तेमाल के अनुकूल एक विशाल बंदरगाह के विकास को मंजूरी दी। इसकी लागत 76,200 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

किर्तेश ढोबले

नई दिल्ली: केंद्र की एनडीए सरकार ने अपने तीसरे कार्यकाल के शुरूआत में ही बड़ा निर्णय लिया है। कैबिनेट ने बुधवार को महाराष्ट्र के वधावन में 76,200 करोड़ रुपये की लागत से हर मौसम में इस्तेमाल के अनुकूल एक विशाल बंदरगाह के विकास को मंजूरी दी। बताया जा रहा है कि इस परियोजना से 12 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के बैठक के बाद इस बात की जानकारी दी।

दुनिया के टॉप 10 बंदरगाहों में होगा शामिल

आधिकारिक बयान के मुताबिक, इस बंदरगाह का निर्माण वधावन पोर्ट प्रोजेक्ट लिमिटेड (वीपीपीएल) करेगी जो जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (जेएनपीए) और महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड (एमएमबी) की एक विशेष उद्देश्यीय इकाई (एसपीवी) है। इसमें जेएनपीए और एमएमबी के पास क्रमशः 74 प्रतिशत और 26 प्रतिशत हिस्सेदारी है। बयान के मुताबिक, वधावन में बनने वाला यह बंदरगाह दुनिया के शीर्ष 10 बंदरगाहों में से एक होगा।

76,220 करोड़ रुपये की लागत, 12 लाख लोगों को मिलेगा रोजगार

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इस परियोजना से 12 लाख लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। बयान के मुताबिक, बंदरगाह परियोजना की कुल लागत 76,220 करोड़ रुपये है जिसमें भूमि अधिग्रहण पर आने वाला खर्च भी शामिल है। इस बड़े बंदरगाह में नौ कंटेनर टर्मिनल होंगे, जिनमें से हरेक टर्मिनल 1,000 मीटर लंबा होगा। इसमें चार बहुउद्देशीय लंगर क्षेत्र, चार लिक्विड कार्गो लंगर, एक रो-रो लंगर और एक तटरक्षक लंगर शामिल होंगे। इस परियोजना की मुख्य ढांचागत संरचना, टर्मिनल का विकास और अन्य वाणिज्यिक ढांचे को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के माध्यम से विकसित किया जाएगा।

रेल संपर्क स्थापित करने को भी मंजूरी

मंत्रिमंडल बैठक में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा वधावन बंदरगाह और राष्ट्रीय राजमार्गों के बीच सड़क संपर्क स्थापित करने के साथ रेल मंत्रालय द्वारा मौजूदा रेल नेटवर्क और अलग से बन रहे माल ढुलाई ढुलाई गलियारे के लिए रेल संपर्क स्थापित करने को भी मंजूरी दी गई। बयान के मुताबिक, इस परियोजना से प्रति वर्ष 29.8 करोड़ टन की कुल क्षमता विकसित होगी। इसमें लगभग 2.32 करोड़ टीईयू (ट्वेंटी फुट समतुल्य) की कंटेनर हैंडलिंग क्षमता भी शामिल है। बंदरगाह पर विकसित की जाने वाली क्षमताएं भारत पश्चिम एशिया यूरोप आर्थिक गलियारा (आईएमईईसी) और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (आईएनएसटीसी) के जरिये आयात-निर्यात गतिविधियों में भी मददगार साबित होंगी। बयान के मुताबिक, पीएम गति शक्ति कार्यक्रम के उद्देश्यों के अनुरूप यह परियोजना आगे की आर्थिक गतिविधि को बढ़ाएगी और इसमें प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा करने की क्षमता भी होगी।

भारत का 13वां प्रमुख बंदरगाह

इस अवसर पर बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गतिशील नेतृत्व में भारत को महाराष्ट्र के वधावन में अपना 13वां प्रमुख बंदरगाह मिलने वाला है।'' उन्होंने कहा कि यह अत्याधुनिक बंदरगाह नए भारत का इंजीनियरिंग चमत्कार बनने जा रहा है, जो आर्थिक वृद्धि को गति देने के साथ इसके समुद्री क्षेत्र को दुनिया के शीर्ष 10 देशों में शामिल करने के लिए प्रेरित करेगा। (एजेंसी इनपुट के साथ)

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