Bhandara News: तुमसर तहसील के बाम्हनी, कोष्टी एवं बोरी गांव के 3–4 ट्रांसफार्मर लंबे समय से खराब पड़े होने के कारण परिसर के किसान और ग्रामीण बिजली की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। इस समस्या का असर केवल खेतों की सिंचाई पर ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की पढ़ाई, ग्रामीणों के दैनिक जीवन और स्थानीय कारोबार पर भी बुरा पड़ रहा है। बिजली विभाग की अनदेखी से ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है।
ग्रामीणों के अनुसार, यह समस्या पिछले छह वर्षों से बनी हुई है और समय-समय पर अधिकारियों को शिकायतें देने के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। किसानों का कहना है कि सिंचाई व्यवस्था ठप पड़ने से फसलें प्रभावित हो रही हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ रहा है।
वहीं, विद्यार्थियों को रात में अंधेरे में पढ़ाई करनी पड़ती है, जिससे उनकी पढ़ाई में बाधा आ रही है। समय पर रखरखाव न होने से ट्रांसफार्मर का इंसुलेशन (Insulation) खराब हो जाता है। अंदर के पुर्जों के टूटने, आंधी-तूफान और बारिश का पानी अंदर जाने जैसी वजहों से भी ट्रांसफार्मर खराब हो सकते हैं। इनकी मरम्मत और समय पर बदलने की प्रक्रिया न होने से यह समस्या वर्षों तक खिंचती जा रही है।
उन्होंने कई बार बिजली विभाग के उपविभागीय अभियंता और कनिष्ठ अभियंता को लिखित में शिकायतें सौंपीं, लेकिन उनकी कुंभकर्णी निद्रा अब तक नहीं टूटी। वर्तमान में भी दिन और रात के समय कई-कई बार बिजली गुल हो जाती है, जिससे परेशानियां और बढ़ जाती हैं।
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इस समस्या को लेकर ग्रामीणों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी मुद्दा उठाया, ताकि बिजली विभाग का ध्यान आकर्षित किया जा सके, परंतु विभाग की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं मिली। भाजपा के जिला उपाध्यक्ष मुन्ना पुंडे ने भी बिजली विभाग के अधिकारियों से मुलाकात कर उन्हें समस्या की गंभीरता से अवगत कराया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी अपने कर्तव्य का पालन न करते हुए सरकार की छवि खराब करने का काम कर रहे हैं। ग्रामीण पदाधिकारी योगेश जमजारे, ताराचंद कहालकर, छोटू कहालकर सहित अन्य लोगों ने कहा है कि यदि इस समस्या का समाधान शीघ्र नहीं किया गया, तो ग्रामीण आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यह आंदोलन शांतिपूर्ण भी हो सकता है और उग्र भी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी बिजली विभाग के अधिकारियों पर होगी।