Shiv Sena UBT On Anti Paper Leak Bill: संसद के मानसून सत्र में केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक-2026' पर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आनंद दुबे ने इस विधेयक के प्रावधानों को नाकाफी बताते हुए दोषियों के लिए मौत की सजा (फांसी) और 100 करोड़ रुपये के भारी जुर्माने का प्रावधान करने की मांग की है।
आनंद दुबे ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आज देश की युवा पीढ़ी (Gen-Z) को अपनी मांगों के लिए सड़कों पर उतरकर आंदोलन करना पड़ रहा है, जो देश के लिए बेहद शर्मनाक स्थिति है।
प्रेस से बात करते हुए शिवसेना यूबीटी नेता आनंद दुबे ने कहा कि देश में लगातार पेपर लीक की घटनाएं हो रही हैं, जिनमें से कई मामले दबा दिए जाते हैं। उन्होंने कहा, "जब तक इस कानून में दोषियों के लिए फांसी की सजा और कम से कम 100 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने का कड़ा प्रावधान नहीं होगा, तब तक इस अपराध में शामिल माफियाओं के मन में डर पैदा नहीं होगा और व्यवस्था में सुधार नहीं आएगा।"
दुबे ने तंज कसते हुए पूछा कि क्या सरकार तभी जागती है जब कॉकरोच जैसी नकारात्मक शक्तियां और उग्र आंदोलन सामने आते हैं? क्या सकारात्मक और शांतिपूर्ण तरीके से बात रखने वाले किसानों और छात्रों की सुनवाई लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागने के बाद ही होगी?
विपक्ष के नेताओं के बयानों और राजनीति से परे हटकर बात करते हुए आनंद दुबे ने कहा कि इस मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय देश की चरमराई शिक्षा व्यवस्था को ठीक करने की सख्त जरूरत है।
चीन, रूस और यूरोपीय देशों की शिक्षा प्रणाली की तुलना भारत से करते हुए उन्होंने पूछा कि क्या हमारे बच्चों के भविष्य और परीक्षाओं को सुरक्षित रखे बिना भारत 'विकसित भारत' बन सकता है? उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यही 'अच्छे दिन' हैं कि सरकार बच्चों के लिए एक निष्पक्ष परीक्षा तक आयोजित नहीं करा पा रही है।
आंदोलनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर बोलते हुए आनंद दुबे ने कहा कि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पार्टी पुलिस तंत्र का पूरा सम्मान करती है, लेकिन मासूम छात्रों पर लाठियां चलाना और उनके करियर को दांव पर लगाना पूरी तरह गलत है।
उन्होंने सरकार से पुरजोर मांग की कि जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर दर्ज सभी एफआईआर (FIR) और कानूनी मुकदमों को तुरंत रद्द कर वापस लिया जाए, ताकि किसी भी होनहार छात्र का भविष्य खराब न हो।