Bhandara Electricity Substation Workers: महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी (महावितरण) के नए शुरू किए गए बिजली उपकेंद्रों में संविदा पर कार्यरत 44 कर्मचारियों को पिछले पांच महीनों से वेतन नहीं मिलने का मामला सामने आया है।
कर्मचारियों को कार्यरत होने के बाद से साप्ताहिक अवकाश और उसका पारिश्रमिक भी नहीं दिए जाने का आरोप महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रसिटी वर्कर्स फेडरेशन ने लगाया है। इस मामले को लेकर प्रस्तावित श्रृंखलाबद्ध अनशन से पहले सहायक श्रम आयुक्त के साथ हुई बैठक में लिखित आश्वासन मिलने के बाद संगठन ने आंदोलन फिलहाल स्थगित कर दिया है।
आउटसोर्सिंग वर्कर्स यूनियन से जुड़े एमएसई वर्कर्स फेडरेशन के नेतृत्व में परिमंडल अध्यक्ष कॉ. अशोक ठवकर के हस्ताक्षर से सहायक श्रम आयुक्त को श्रृंखलाबद्ध अनशन की सूचना दी गई थी। इसके बाद सहायक श्रम आयुक्त के कक्ष में संगठन, महावितरण और स्मार्ट सर्विसेस के प्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक हुई। बैठक में स्मार्ट सर्विसेस को 30 सितंबर तक कर्मचारियों के पांच माह के बकाया वेतन का भुगतान करने के आदेश दिए जाने की जानकारी संगठन ने दी है।
साथ ही महावितरण मुख्य नियोक्ता संस्था होने के कारण मामले में तत्काल कार्रवाई करने और ऐसा नहीं होने पर इसकी जिम्मेदारी महावितरण पर रहने की चेतावनी दिए जाने की बात भी संगठन ने कही है। कॉ. अशोक ठवकर, कॉ. रामचंद्र पाटील, नामदेव चौधरी, कॉ. दिलीप राहंगडाले और कॉ. सुरेश तितरे सहित पदाधिकारियों ने सहायक श्रम आयुक्त के समक्ष विभिन्न मांगें रखीं।
24 सितंबर से प्रस्तावित अनशन को सकारात्मक चर्चा और लिखित आश्वासन मिलने के बाद फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया गया है। राज्य पदाधिकारी मोहन शर्मा, कृष्णा भोयर, दत्ता पाटील तथा संविदा संगठन के महासचिव कॉ. नीलकंठ देशमुख ने भी इस संबंध में अपनी भूमिका स्पष्ट की है।
महावितरण द्वारा नए बनाए गए बिजली उपकेंद्रों को संविदा पद्धति से संचालित करने का ठेका पुणे की मे. स्मार्ट सर्विसेस प्रा. लि. को दिया गया है। गोंदिया परिमंडल के अंतर्गत आने वाले इन उपकेंद्रों में भंडारा और गोंदिया जिले के बेरोजगार युवाओं को संविदा पर नियुक्त किया गया है।
ये कर्मचारी बिजली आपूर्ति सुचारु बनाए रखने का काम कर रहे हैं। कुल 11 उपकेंद्रों में 44 कर्मचारी कार्यरत हैं। संगठन का कहना है कि पांच माह से वेतन नहीं मिलने के कारण कर्मचारियों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा साप्ताहिक अवकाश और उसके बदले मिलने वाले पारिश्रमिक का भी भुगतान नहीं किया गया है।