Bhandara Students On TET Parer Leak: महाराष्ट्र की शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद द्वारा रविवार, 28 जून को आयोजित होने वाली 'महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा' (TET) प्रश्नपत्र लीक होने की आशंका के चलते अंतिम समय में रद्द कर दी गई। हाल ही में नीट (NEET) परीक्षा से जुड़े राष्ट्रीय विवाद के बाद अब राज्य स्तर पर टीईटी परीक्षा रद्द होने से लाखों अभ्यर्थियों में भारी आक्रोश और नाराजगी है।
शिक्षक बनने का सपना संजोए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के हजारों अभ्यर्थियों ने इस परीक्षा के लिए महीनों तक कठिन परिश्रम किया था। कई उम्मीदवार विपरीत आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद दिन-रात तैयारी में जुटे थे, लेकिन परीक्षा शुरू होने से महज कुछ घंटे पहले आई इस सूचना ने उनकी पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया। TET परीक्षा अचानक रद्द होने के बाद अभ्यर्थियों और विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक संगठनों ने परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित व पारदर्शी बनाने के साथ-साथ इस रैकेट में शामिल दोषियों पर कठोरतम कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
कांग्रेस भंडारा जिलाध्यक्ष मुकुंद साखरकर ने कहा है कि "टीईटी जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होना केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं है, बल्कि यह लाखों युवाओं के भविष्य पर सरेआम डाका है। महाराष्ट्र सरकार हर बार केवल जांच का आश्वासन देकर पल्ला झाड़ लेती है, लेकिन छात्रों को जो मानसिक, आर्थिक और शैक्षणिक नुकसान उठाना पड़ा है, उसकी भरपाई आखिर कौन करेगा?"
भंडारा बेसिक उच्च प्राथमिक विद्यालय मुख्याध्यापिका अलका पटोले ने कहा है कि अलका पटोले "प्रतियोगी परीक्षाएं ग्रामीण और मध्यमवर्गीय परिवारों के होनहार विद्यार्थियों के लिए जीवन बदलने का एक बड़ा अवसर होती हैं। लगातार हो रही पेपर लीक की घटनाओं से छात्रों का पूरी परीक्षा प्रणाली पर से भरोसा कमजोर हो रहा है। प्रशासन को इस मामले के दोषियों को चिन्हित कर उन्हें कठोरतम दंड देना चाहिए।"
भंडारा के TET अभ्यर्थी चारू निंबार्ते ने कहा है कि "हम अभ्यर्थी दिन-रात एक करके मेहनत करते हैं ताकि अपने परिवार की उम्मीदों को पूरा कर सकें, लेकिन बार-बार पेपर लीक होने से हमारा मनोबल पूरी तरह टूट जाता है। देश में पहले ही बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है, ऐसे में इस तरह की लापरवाही युवाओं के भविष्य के साथ सरासर खिलवाड़ है।"
ऑल इंडिया आदिवासी एम्प्लॉइज फेडरेशन भंडारा जिलाध्यक्ष अजाबराव चिचामे ने कहा है कि "आदिवासी और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं के लिए टीईटी जैसी परीक्षाएं सरकारी सेवा में सम्मानजनक प्रवेश का एक महत्वपूर्ण माध्यम हैं। बार-बार पेपर लीक होने से इन वंचित वर्ग के विद्यार्थियों के अधिकारों का हनन हो रहा है और यह पूरी परीक्षा प्रणाली की कार्यक्षमता पर बड़ा सवालिया निशान है।"
मनसे उपजिलाध्यक्ष शैलेश गजभिये ने कहा है कि "परीक्षार्थियों के परीक्षा केंद्र पहुँचने से पहले ही प्रश्नपत्र का बाजार में लीक हो जाना महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद के माथे पर एक बड़ा कलंक है। यह मामला केवल परीक्षा रद्द होने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने सरकारी व्यवस्था की विश्वसनीयता को पूरी तरह कटघरे में खड़ा कर दिया है।"
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पुर्व सीनेट सदस्य प्रवीण उदापुरे ने कहा है कि "टीईटी परीक्षा अचानक रद्द होने से दूर-दराज से आए हजारों छात्रों को भारी आर्थिक और मानसिक नुकसान झेलना पड़ा है। हमारी मांग है कि केवल परीक्षा रद्द करना ही काफी नहीं है, बल्कि इस पूरे पेपर लीक रैकेट के मुख्य मास्टरमाइंड का पर्दाफाश कर उसके खिलाफ मकोका जैसी कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।"