तैयारी पूरी, पर पेपर लीक की बीमारी पुरानी! महा-टीईटी रद्द होने से नागपुर के 16 हजार छात्रों में भारी रोष

Nagpur Maha TET Paper Leak: पेपर लीक के कारण महा-टीईटी परीक्षा ऐन वक्त पर रद्द होने से नागपुर के 16,107 अभ्यर्थियों समेत राज्यभर के उम्मीदवारों में भारी नाराजगी और निराशा फैल गई है।
Preparations complete, but the menace of paper leaks persists! Massive outrage among 16,000 students in Nagpur following the cancellation of the Maha-TET.
महा टीईटी, पेपर लीक, प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सौजन्य AI)
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Nagpur Teacher Eligibility Test: महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद द्वारा आयोजित 'महा-टीईटी' (शिक्षक पात्रता परीक्षा) पेपर लीक होने के कारण राज्य सरकार ने ऐन मौके पर रद्द कर दी। इस निर्णय से नागपुर शहर और जिले के हजारों अभ्यर्थियों में भारी रोष और निराशा व्याप्त है। 28 जून को यह परीक्षा राज्य भर में होनी थी।

नागपुर शहर में 35 परीक्षा केंद्रों पर कुल 16,107 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल होने वाले थे। पहले यह परीक्षा 21 जून को निर्धारित थी, जिसे एक सप्ताह के लिए आगे बढ़ाया गया था। पेपर लीक होने जैसी घटना ने पूरी परीक्षा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अभ्यर्थियों का विवरण

  • यह परीक्षा दो सत्रों में होने वाली थी।
  • पेपर-1 (कक्षा 1 से 5): प्राथमिक शिक्षकों के लिए, जिसमें 6,068 अभ्यर्थी शामिल थे।
  • पेपर-2 (कक्षा 6 से 8): उच्च प्राथमिक शिक्षकों के लिए, जिसमें 10,039 अभ्यर्थी शामिल थे।

पुरानी सफलता और नई चुनौती

एक तरफ जहां 2025-26 सत्र की परीक्षा रद्द होने से हड़कंप मचा है, वहीं दूसरी ओर पिछले सत्र (2024-25) के सफल अभ्यर्थियों के लिए राहत की खबर है। पिछले सत्र में जिले के करीब 1,000 अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए थे, जिन्हें प्राथमिक शिक्षण विभाग द्वारा प्रमाणपत्र वितरित किए जा रहे हैं।

विभाग ने सफल अभ्यर्थियों से जल्द से जल्द अपने प्रमाणपत्र प्राप्त करने का आग्रह किया है। इस घटना के बाद अब प्रशासन पर पारदर्शी तरीके से दोबारा परीक्षा आयोजित करने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने का भारी दबाव है।

प्रत्येक पेपर 150 अंकों का था, जिसके लिए ढ़ाई घंटे का समय निर्धारित किया गया था। परीक्षा को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा और निगरानी के पुख्ता इंतजाम किए थे, लेकिन पेपर लीक ने सारी तैयारियों पर पानी फेर दिया।

अभ्यर्थियों में बढ़ी असुरक्षा और संशय

परीक्षा के बार-बार टलने और अब पेपर लीक के कारण रद्द होने से अभ्यर्थियों ने परीक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है।

राज्य परीक्षा परिषद वर्ष में दो बार यह परीक्षा आयोजित करती है, लेकिन इस तरह की धांधली ने मेधावी छात्रों के भविष्य को अनिश्चितता के दौर में डाल दिया है। अब सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम और परीक्षा की नई तारीख पर टिकी हैं।

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