लाखनी का ग्रामीण अस्पताल  (सोर्स : एआय)
भंडारा

भंडारा के लाखनी में सड़क हादसे के बाद खुली स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल, न पोस्टमार्टम गृह चालू, न ट्रॉमा सेंटर

Lakhani Accident: लाखनी में पिंपलगांव सड़क हादसे के बाद स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली उजागर हुई है। ट्रॉमा सेंटर, आईसीयू और शव पोस्टमार्टम गृह की कमी से पीड़ितों को भारी फजीहत झेलनी पड़ रही है।

वेदांत जोशी

Bhandara Health Infrastructure News: राष्ट्रीय महामार्ग पर स्थित लाखनी शहर और उसके आसपास के क्षेत्रों में आए दिन होने वाली छोटी-बड़ी सड़क दुर्घटनाएं प्रशासन के दावों की हवा निकाल रही हैं। हाल ही में पिंपलगांव के पास हुए भीषण सड़क हादसे ने लाखनी तहसील की स्वास्थ्य और आपातकालीन व्यवस्था की जर्जर स्थिति को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। दुर्घटना के बाद गंभीर रूप से घायल मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत साकोली, भंडारा और नागपुर रेफर करना पड़ा, जबकि मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम कराने के लिए परिजनों को भंडारा भागना पड़ा।

नवीनीकरण के अभाव में ठप पड़ा है पोस्टमार्टम गृह

लाखनी में लाखोरी रोड और ग्रामीण अस्पताल परिसर दोनों स्थानों पर पोस्टमार्टम गृह की व्यवस्था कागज पर मौजूद है, लेकिन हकीकत में दोनों सुविधाएं पूरी तरह ठप पड़ी हैं। पर्याप्त बिजली आपूर्ति, आवश्यक उपकरणों और मूलभूत सुविधाओं के अभाव में पोस्टमार्टम का काम ठप्प है। सूत्रों के अनुसार, विच्छेदन गृह के नवीनीकरण का ठेका तो दे दिया गया था, लेकिन यह कार्य लंबे समय से ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। नतीजा यह है कि हर दुर्घटना के बाद शोकाकुल परिजनों को पोस्टमार्टम के लिए भारी फजीहत उठानी पड़ती है।

ट्रॉमा सेंटर और आईसीयू सुविधाओं का भारी अभाव

लाखनी तहसील स्तर पर केवल प्राथमिक सुविधाएं प्रदान करने वाला एक ग्रामीण अस्पताल ही उपलब्ध है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर बसे इस महत्वपूर्ण केंद्र में गंभीर दुर्घटनाओं के समय जान बचाने वाली आधुनिक चिकित्सा प्रणाली, ट्रॉमा सेंटर और आईसीयू का पूरी तरह अभाव है। तुलनात्मक रूप से देखें तो गोंदिया जिले के देवरी जैसे सीमावर्ती क्षेत्र में क्रिटिकल केयर सुविधाएं सक्रिय हैं, लेकिन भंडारा जिले के लाखनी-साकोली जैसे अति-महत्वपूर्ण हादसों के हॉटस्पॉट को अब तक इस सुविधा से वंचित रखा गया है।

हादसे के बाद उठते हैं सवाल, फिर ढाक के तीन पात

स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि किसी भी बड़े सड़क हादसे के तुरंत बाद स्वास्थ्य तंत्र की कमियां चर्चा का विषय बनती हैं। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक प्रशासन से सवाल पूछे जाते हैं, लेकिन कुछ ही दिनों में मामला फिर ठंडे बस्ते में चला जाता है। सालों से उठ रही जायज मांगों के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस निर्णय न होने से लाखनी की स्वास्थ्य व्यवस्था लगातार सवालों के घेरे में खड़ी है।

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