भंडारा

परीक्षा खत्म होते ही कोचिंग माफिया सक्रिय, विज्ञापनों और भारी फीस से अभिभावक परेशान

भंडारा में परीक्षा के बाद कोचिंग क्लासेस का बढ़ता दबाव, भारी फीस और मानसिक तनाव का सामना कर रहे छात्र।

महाराष्ट्र डेस्क

Bhandara News: भंडारा जिले में बोर्ड की परीक्षाएं खत्म हुए अभी कुछ ही दिन बीते हैं, लेकिन नतीजों का इंतजार किए बिना ही निजी कोचिंग क्लासेस संचालकों ने अपना बाजार सजा लिया है. भंडारा शहर सहित साकोली, तुमसर और लाखनी जैसे तहसील केंद्रों पर छात्रों के प्रवेश के लिए होड़ मची हुई है. विज्ञापनों, लुभावने संदेशों और लगातार आने वाले फोन कॉल्स ने अभिभावकों का जीना मुहाल कर दिया है. जिला मुख्यालय होने के नाते भंडारा में शैक्षणिक संस्थाओं का बड़ा जाल है.

शहर में छोटेबड़े करीब 150 से 200 कोचिंग क्लास चल रहे हैं. इनमें से कुछ प्रोफेशनल क्लासेस हैं, तो कुछ स्थानीय शिक्षकों की ओर से संचालित हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि 100 से अधिक क्लासेस तो गलियों और घरों के कमरों में बिना किसी बुनियादी सुविधा के चलाए जा रहे हैं. कक्षा 5वीं से ही प्रतियोगी परीक्षाओं के नाम पर बच्चों को इनमें धकेला जा रहा है.

डॉक्टर और इंजीनियर बनाने के सपने दिखाकर ये क्लासेस अभिभावकों की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं. सिविल लाइंस, खात रोड और राजीव गांधी चौक स्थित बड़े क्लासेस में JEE और NEET की तैयारी के नाम पर सालाना 50 हजार से 2 लाख रुपये तक वसूले जा रहे हैं. एंट्रेंस टेस्ट और स्कॉलरशिप के नाम पर भारी छूट का दावा किया जाता है, लेकिन इसके बावजूद फीस का आंकड़ा मध्यमवर्गीय परिवार की पहुंच से बाहर ही रहता है. बाक्स मानसिक तनाव और सुविधाओं का अभाव परीक्षा के बाद बच्चों को मानसिक विश्राम और खेलकूद की जरूरत होती है, लेकिन परीक्षाएं खत्म होते ही अगले दिन से समर बैच शुरू कर दिए जाते हैं. कई क्लासेस में एक छोटे से कमरे में 50 से 100 बच्चों को बैठाया जाता है.

वहां न तो वेंटिलेशन की सुविधा है और न ही पीने के साफ पानी या शौचालयों का उचित प्रबंध. एक बार फीस जमा होने के बाद यदि छात्र क्लास छोड़ना चाहे, तो पैसे वापस नहीं किए जाते. बाक्स बच्चों की मौलिक सोच हुई खत्म स्कूलों में यदि सही ढंग से पढ़ाई हो, तो ट्यूशन की जरूरत नहीं है. अभिभावकों के मन में सुरक्षा की भावना और अंकों की रेस ने इन क्लासेस को पनपने का मौका दिया है. तैयार नोट्स पर निर्भर रहने से बच्चों की मौलिक सोच खत्म हो रही है. प्रो. सुमंत देशपांडे, शिक्षाविद.

शहर में 150 से 200 कोचिंग क्लास घरगलियारों में 100 से अधिक क्लासेस JEENEET के नाम पर 50,000 हजार से 2 लाख वसूल एक छोटे कमरे में 50 से 100 बच्चे ले रहे ट्युशन

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