आरओ पानी (सौजन्य-नवभारत) 
भंडारा

ठंडा मतलब शुद्ध कतई नहीं! 40 रुपये की एक 'केन' दे सकती है किडनी और पेट की गंभीर बीमारियां

Water Can Business Quality: ठंडा पानी मतलब शुद्ध कतई नहीं! वॉटर केन के कारोबार में नियमों की अनदेखी। बिना लाइसेंस चल रहे प्लांट और पुरानी बोतलों का खेल जनता की सेहत पर भारी। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

प्रिया जैस

Illegal RO Plants News: शादी-ब्याह हो या कोई छोटा-बड़ा आयोजन, जिले के शहरी और ग्रामीण इलाकों में इन दिनों केन के पानी का चलन तेजी से बढ़ा है। ठंडा पानी मतलब शुद्ध पानी की आम धारणा का लाभ उठाकर केन के पानी का व्यवसाय तेजी से फल-फूल रहा है। हालांकि, इस पानी के शुद्धिकरण की प्रक्रिया और इसकी असल गुणवत्ता को लेकर अब गंभीर संदेह जताया जा रहा है।

जिले में जगह-जगह पेयजल आपूर्ति करने वाले सैकड़ों प्लांट खुल गए हैं। नियमों के अनुसार, ऐसे प्रोजेक्ट्स के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन और भारतीय मानक ब्यूरो से पंजीकरण व अनुमति अनिवार्य है। इसके बावजूद, अनेक कारोबारी बिना किसी वैध लाइसेंस के सीधे बोरवेल का पानी केन में भरकर बेच रहे हैं। एक वॉटर केन 35 से 40 रुपये में आसानी से उपलब्ध हो जाती है, जिसे नागरिक बिना शुद्धता की जांच किए खरीद रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि कई स्थानों पर शुद्धिकरण के लिए आवश्यक रिवर्स ऑस्मोसिस और अल्ट्रावॉयलेट तकनीक का सही संचालन नहीं होता। समय पर फिल्टर न बदलना, टैंक की सफाई न करना और पुरानी प्लास्टिक केन का बार-बार उपयोग करना पानी की गुणवत्ता को खराब कर रहा है।

दूसरी ओर, नगर परिषद की ओर से स्थापित कई सरकारी आरओ प्लांट देखरेख के अभाव में बंद पड़े हैं। सार्वजनिक जल आपूर्ति में अनियमितता के कारण लोग मजबूरन इन निजी विक्रेताओं पर निर्भर हैं।

सेहत के लिए बड़ा खतरा

केवल ठंडा होने से पानी शुद्ध नहीं हो जाता। केन के पानी में अक्सर आवश्यक खनिजों की कमी होती है या टीडीएस का स्तर अनियंत्रित होता है। ऐसा दूषित पानी पीने से पेट के विकार और किडनी से संबंधित गंभीर बीमारियां होने की आशंका रहती है। नागरिकों को शुद्धता की पुष्टि के बिना पानी नहीं पीना चाहिए।

  • डॉ. नितिन तुरस्कर

गुणवत्ता बनाए रखना जरूरी

पानी शुद्ध करने के लिए वे आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हैं। नियमित टीडीएस जांच करते हैं। प्रशासन को अवैध तरीके से चल रहे प्लांटों पर अंकुश लगाना चाहिए ताकि गुणवत्ता बनाए रखने वाले व्यवसायी टिक सकें।

  • राजेश मेश्राम, पानी विक्रेता

सरकारी सिस्टम फेल

शहर के नागरिकों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन ने कुछ स्थानों पर आरओ प्लांट लगाए थे, लेकिन वे अब कबाड़ में तब्दील हो रहे हैं। सरकारी मशीनरी के विफल होने से निजी पानी माफियाओं का दबदबा बढ़ गया है। प्रशासन को चाहिए कि वह अवैध प्लांटों पर कड़ी कार्रवाई करे और अधिकृत विक्रेताओं को प्रोत्साहित करे।

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई, 12 विपक्षी पार्टियों की संयुक्त याचिका को साथ सुनेगा कोर्ट

गुवाहाटी फायरिंग पर उठ रहे सवाल! कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने हिमंता बिस्वा सरमा पर साधा निशाना

तमिलनाडु की जेल में बड़ी सेंधमारी! पुलिस पर हमला करके 17 कैदी हुआ रफ्फू चक्कर, हो रही ताबड़तोड़ छापेमारी

सपा नेता सिनोद शाक्य को BJP ने बनाया प्रदेश कार्यसमिति का सदस्य, सोशल मीडिया पर वायरल हो रही लिस्ट

Hotel Room Safety: होटल में चेक-इन करते ही करें ये 10 जरूरी काम, सुरक्षा में न करें लापरवाही