भंडारा जल भंडारण (सोर्सः सोशल मीडिया)
भंडारा

भंडारा की सिंचाई परियोजनाएं सूखने की कगार पर, हिवरा परियोजना में सिर्फ 2.01% पानी शेष,रबी फसलों पर संकट

Bhandara Water Crisis: भंडारा जिले में अल नीनो के प्रभाव और कम बारिश के कारण जलसंकट गहराने लगा है। हिवरा लघु सिंचाई परियोजना में केवल 2.01 प्रतिशत उपयोगी जल शेष है।

आंचल लोखंडे

Highlights:

  • पिछले वर्ष इसी अवधि में यहां 16.07 प्रतिशत जल उपलब्ध था।

  • आंबागड में 10.71% और पवनार खारी में 11.20% जल भंडारण शेष है।

  • जलस्तर पिछले वर्ष के 78.64% से घटकर 12.48% रह गया।

Bhandara Irrigation Project: भंडारा जिले में इस वर्ष अल नीनो के प्रभाव और कम बारिश के कारण जल संकट की स्थिति बेहद विकराल होती जा रही है। धान के कटोरे के रूप में पहचान रखने वाले भंडारा जिले में कृषि और पेयजल व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली प्रमुख जल परियोजनाएं अभी से दमतोड़ने लगी हैं।

मध्यम और लघु सिंचाई परियोजनाओं में जलस्तर का तेजी से गिरना आने वाले दिनों में भीषण सूखे और जलसंकट की ओर स्पष्ट इशारा कर रहा है। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, लघु परियोजना के तहत संचालित हिवरा परियोजना में वर्तमान में केवल 2.01 प्रतिशत उपयोगी जल ही शेष रह गया है।

लघु परियोजनाओं की स्थिति भी चिंताजनक

पिछले वर्ष इसी अवधि में इस परियोजना में 16.07 प्रतिशत पानी उपलब्ध था। अन्य लघु परियोजनाओं की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। आंबागड परियोजना में महज 10.71 प्रतिशत और पवनार खारी परियोजना में केवल 11.20 प्रतिशत जल भंडारण बचा है। जिले के ऐतिहासिक माजी मालगुजारी (मामा) तालाबों की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है।

मामा तालाब में आज केवल12.48 प्रतिशत जल शेष बचा

डोंगरगांव के मामा तालाब में आज केवल12.48 प्रतिशत जल शेष बचा है, जबकि पिछले वर्ष इसमें 78.64 प्रतिशत पानी उपलब्ध था। इसके अलावा जिले की अन्य लघु परियोजनाओं में कुरमुड़ा में 15.38%, डोंगरला में 22.21%, कारली में 26.21%, नागठाना में 18.14%, डोडमाजरी में 29.80%, रावणवाड़ी में 22.29% और न्याहारवानी में 22.93% ही जल भंडारण रह गया है। वहीं लोभी मामा तालाब में 28.61%, इंदोरा में 37.52% और झरी में 30.90% पानी शेष है। लगातार बिगड़ते मौसम और कम बारिश के चलते ये सिंचाई योजनाएं पूरी तरह सूखने के कगार पर पहुंच चुकी हैं, जिससे रबी सीजन की फसलों और पेयजल आपूर्ति पर संकट मंडराने लगा है।

केवल तीन जल संरचनाएं 100 फीसदी भरी

जिले की कुल 31 लघु परियोजनाओं में इस समय औसतन केवल 54.02 प्रतिशत जल भंडारण बचा है, जबकि पिछले वर्ष आज की तिथि में यह आंकड़ा 89.93 प्रतिशत था। आश्चर्यजनक पहलू यह है कि पिछले साल इन 31 में से 18 लघु परियोजनाएं पूरी तरह यानी 100 प्रतिशत भरी हुई थीं, लेकिन इस वर्ष केवल कवलेवाड़ा और वाकल परियोजनाओं में 100 फीसदी पानी उपलब्ध है। दूसरी तरफ, जिले के 28 मामा तालाबों में वर्तमान में कुल मिलाकर 61 प्रतिशत जल उपलब्ध है।

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