भंडारा में शिवभोजन अनुदान लंबित सोर्स: सोशल मीडिया
भंडारा

भंडारा मे प्रबंधक की जेब से चल रही शिवभोजन थाली;3 माह से 1.5 करोड़ का आवंटन अटका, उधारी के राशन से चल रहा खाना

Bhandara Shivbhojan Funds Stuck: भंडारा में 59 शिवभोजन केंद्रों का जून-अगस्त का करीब 1.5 करोड़ रुपए अनुदान लंबित है। संचालक उधारी पर सामान लेकर 10 रुपए की थाली की सेवा जारी रखे हुए हैं।

मनीषा बोंदरे

Bhandara Shiv Bhojan Pending Subsidy: भंडारा जिले में 59 शिवभोजन केंद्रों का जून से अगस्त तक करीब 1.5 करोड़ रुपए का अनुदान लंबित है।

इसके बावजूद केंद्र संचालक उधारी पर राशन और अन्य सामान लेकर रोजाना करीब 5,900 थालियां परोस रहे हैं।

शिवभोजन योजना अब केंद्र संचालकों के लिए आर्थिक बोझ?

गरीब और जरूरतमंदों को महज 10 रुपए में भोजन उपलब्ध कराने वाली शिवभोजन योजना अब केंद्र संचालकों के लिए आर्थिक बोझ बनती जा रही है। भंडारा जिले के 59 केंद्रों का जून, जुलाई और अगस्त का करीब 1.5 करोड़ रुपए अनुदान अब तक लंबित है।

निधि नहीं मिलने के बावजूद योजना बंद न हो, इसके लिए संचालक अपनी जेब से खर्च करने के साथ उधारी पर राशन और अन्य जरूरी सामान लेकर सेवा जारी रखे हुए हैं।

59 केंद्रों पर रोज 5,900 थालियां

जिले में कुल 59 शिवभोजन केंद्र संचालित हैं। इनमें भंडारा तहसील के 15, तुमसर के 12, मोहाड़ी के 8, लाखनी के 8, पवनी के 5 और लाखांदुर के 5 केंद्र शामिल हैं। इन केंद्रों पर प्रतिदिन करीब 5,900 थालियां वितरित करने का लक्ष्य है।

लाभार्थियों से प्रति थाली 10 रुपए लिए जाते हैं। शासन की ओर से ग्रामीण क्षेत्र में प्रति थाली 25 रुपए और शहरी क्षेत्र में 40 रुपए अनुदान दिया जाता है।

तीन महीने से अटका है अनुदान

केंद्र संचालकों के अनुसार, मार्च से मई तक का करीब 1.57 करोड़ रुपए अनुदान अब प्राप्त हो चुका है और उसके वितरण की प्रक्रिया शुरू है। हालांकि जून से अगस्त तक का करीब 1.5 करोड़ रुपए अब भी लंबित है।

भंडारा जिले के संचालकों के मुताबिक, एक महीने में औसतन 56 से 57 लाख रुपए अनुदान की जरूरत होती है। लंबे समय तक निधि नहीं मिलने से अनाज, दाल, तेल, सब्जियां, मसाले, गैस, बिजली, पानी, किराया और कर्मचारियों के वेतन का खर्च निकालना मुश्किल हो रहा है।

उधारी पर सामान लेकर सेवा जारी

एक केंद्र संचालक ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि शिवभोजन योजना जरूरतमंदों के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए आर्थिक परेशानी के बावजूद केंद्र बंद नहीं किया गया है। रोजमर्रा की जरूरतों का सामान उधारी पर लेकर भोजन की व्यवस्था जारी रखी जा रही है।

तकनीकी खर्च भी संचालकों पर

शिवभोजन थाली का वितरण एप के माध्यम से दर्ज किया जाता है। लाभार्थी का नाम और फोटो दर्ज करने के साथ रोजाना मेन्यू अपलोड करना अनिवार्य है। केंद्रों में सीसीटीवी और 100 मीटर के दायरे में जियो-फेंसिंग की व्यवस्था भी आवश्यक है। इन तकनीकी व्यवस्थाओं का खर्च भी केंद्र संचालकों को ही उठाना पड़ता है।

समय पर निधि मिलने की मांग

लाभार्थी गोपाल बागड़े ने बताया कि 10 रुपए में भोजन मिलने से रोजमर्रा के खर्च में राहत मिलती है। वहीं जिला आपूर्ति अधिकारी रतनलाल ठाकरे ने बताया कि मार्च से मई का अनुदान जिले को प्राप्त हो चुका है और वितरण प्रक्रिया शुरू है। जून से अगस्त के लंबित अनुदान के लिए शासन से निधि प्राप्त होते ही नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

पश्चिम रेलवे चलाएगी दो और स्पेशल ट्रेन, बांद्रा-खातीपुरा और उधना-बरौनी ट्रेन का शेड्यूल जारी; जानें किराया

फर्जी एनकाउंटर डर: तिहाड़ से शामली ले जाए जाने पर दो गैंगस्टरों ने मांगी हथकड़ी-बेड़ियां और बुलेटप्रूफ जैकेट

लद्दाख में वायुसेना ने रचा इतिहास: 13,629 फीट की ऊंचाई पर उतरा गजराज; चीन सीमा पर बढ़ी भारत की क्षमता

2004 में सोनिया गांधी ने क्यों ठुकराया था प्रधानमंत्री पद, क्या राहुल और प्रियंका असली वजह; जानें अंदर की बात

अभिषेक बनर्जी के घर पर झड़प मामले में ममता ने दी सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी, BJP पर साजिश का लगाया आरोप