भंडारा नगर परिषद (सोर्स: सोशल मीडिया) 
भंडारा

भंडारा में प्रभाग रचना पर 9 आपत्तियां दाखिल, केसलवाड़ा क्षेत्र को शामिल न करने पर उठे सवाल

Bhandara News: सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। भंडारा नगर परिषद में भौगोलिक प्रभाग प्रारूप पर 9 आक्षेप दाखिल हुए हैं।

आकाश मसने

Bhandara Municipal Council Election News: सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के आधार पर महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई है। भंडारा नगर परिषद में भी चुनाव की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। राज्य निर्वाचन आयोग के आदेशानुसार भौगोलिक प्रभागों का प्रारूप जारी किया गया है। इस पर नागरिकों की ओर से कुल 9 आक्षेप दाखिल किए गए हैं। भंडारा नगर परिषद के मुख्याधिकारी करण कुमार चव्हाण के मार्गदर्शन में तैयार प्रारूप को 18 अगस्त को सार्वजनिक किया गया था।

नागरिकों, राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों से 18 से 31 अगस्त के दौरान आक्षेप और सुझाव दर्ज करने का आव्हान किया गया था। इस अवधि में अलग-अलग 9 आपत्तियां दर्ज की गई।

उपमुख्याधिकारी आकाश सहारे ने बताया कि इन सभी आक्षेपों पर एक प्रस्ताव बनाकर 4 सितंबर को जिलाधिकारी भंडारा को सौंपा जाएगा। इसके बाद जिलाधिकारी की ओर से सुनवाई होगी और यदि आवश्यक हुआ तो संशोधन कर अंतिम प्रारूप राज्य निर्वाचन आयोग को भेजा जाएगा। इसके उपरांत नया प्रारूप सार्वजनिक किया जाएगा।

इस बार दो सदस्य बढ़े

वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार भंडारा शहर की जनसंख्या 91,845 है। वर्ष 2016 के सार्वत्रिक चुनाव में नगर परिषद क्षेत्र में 16 प्रभाग और 33 नगरसेवक थे। अब महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत एवं औद्योगिक नगरी अधिनियम 1965 की धारा 9 में संशोधन के चलते सदस्य संख्या दो बढ़ी है।

इस प्रकार अब 17 प्रभागों से कुल 35 नगरसेवक निर्वाचित होंगे। इनमें वाड़ी नगर परिषद क्षेत्र के 16 प्रभागों में 2 सदस्य और एक प्रभाग में 3 सदस्य रहेंगे। प्रारूप प्रभाग रचना 18 से 31 अगस्त तक नोटिस बोर्ड व संकेत स्थल पर प्रदर्शित की गई। इसमें 9 आपत्तियां दर्ज की गई। इन आपत्तियों और सुझावों की सुनवाई 1 से 11 सितंबर के बीच जिलाधिकारी करेंगे। राज्य निर्वाचन आयोग अंतिम मंजूरी 26 से 30 सितंबर तक देगा।

केसलवाड़ा क्षेत्र पर विवाद

केसलवाड़ा ग्राम पंचायत क्षेत्र के नागरिकों ने आपत्ति दर्ज करते हुए सवाल उठाया कि उनके क्षेत्र को नगर परिषद की प्रभाग रचना में शामिल क्यों नहीं किया गया। उल्लेखनीय है कि नगर परिषद सीमा विस्तार का प्रस्ताव वर्षों पहले दिया गया था, लेकिन कुछ ग्राम पंचायतों की लिखित आपत्तियों के कारण पिछले 5 वर्षों से यह प्रस्ताव लंबित पड़ा हुआ है।

हर राजनीतिक दल तैयारी में जुटा

प्रशासक राज लागू होने के पूर्व भंडारा नगर परिषद पर भाजपा की सत्ता थीं।जाहिर है कि भाजपा ने नए क्षेत्रों में संगठनात्मक विस्तार का लाभ उठाकर सत्ता को अधिक प्रबल बनाने की दिशा में प्रयास करेगी। कांग्रेस परंपरागत मतदाताओं के भरोसे सत्ता हासिल करने का प्रयास करेगी। भंडारा शिवसेना (शिंदे सेना) का मजबूत कीला है। इसलिए शिवसेना के प्रयास होंगे कि अपने इस क्षेत्र की नगर परिषद को अपने कब्जे में लें। इस दिशा में शिवसेना की ओर से विधायक नरेंद्र भोंडेकर के नेतृत्व में बंधे हुए कदमों से जाल बिछाया जा रहा है।

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