Bhandara Administration: इस वर्ष मानसूनी सत्र पर अल नीनो का असर देखने को मिल रहा है, जिसके कारण जिले में सामान्य से काफी कम बारिश होने की संभावना मौसम विशेषज्ञों की ओर से व्यक्त की जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या इस बार बारिश 2013 के स्तर से भी कम होगी ? हालांकि बारिश कितनी कम होगी और इसका कृषि तथा जनजीवन पर कितना गंभीर असर पड़ेगा, इस बारे में सटीक आकलन करना अभी जल्दबाजी होगी।
इसके बावजूद स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने ऐहतियात के तौर पर आवश्यक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। प्रशासन की ओर से जिले के प्रमुख जलाशयों और बांधों में जल भंडारण को सुरक्षित करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। पानी की संभावित किल्लत को ध्यान में रखते हुए निर्देश जारी किए गए हैं कि जलाशयों का पानी यूं ही सिंचाई के लिए किसानों को उपलब्ध न कराया जाए। प्राथमिकता के आधार पर पेयजल आपूर्ति और अति आवश्यक जरूरतों के लिए जल आरक्षित रखने की रणनीति बनाई गई है, ताकि आने वाले महीनों में किसी बड़े जल संकट का सामना न करना पड़े।
यदि पिछले 15 वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो जिले में बारिश का मिजाज काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। पिछले डेढ़ दशक में सबसे कम बारिश वर्ष 2017 में दर्ज की गई थी, जब जिले में महज 67 फीसदी यानी 884.01 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड हुई थी। इसके विपरीत, वर्ष 2013 में जिले ने पिछले 15 सालों की सबसे अधिक बारिश देखी थी। उस समय सामान्य का 132 फीसदी यानी 1634.34 मिलीमीटर जल बरसा था, जिससे जलस्रोत लबालब भर गए थे।
वहीं पिछले 5 वर्षों के मानसूनी प्रदर्शन का विश्लेषण करें तो आंकडे मिला-जुला परिणाम दशति है। वर्ष 2021 में जिले में 1138.3 मिमी (86 प्रतिशत) बारिश दर्ज हुई थी। इसके अगले साल 2022 में जोरदार मानसून रहा और 1588.0 मिमी (119 प्रतिशत) बारिश हुई। वर्ष 2023 में 1319.2 मिमी (101 प्रतिशत) के साथ मानसूनी सत्र सामान्य रहा।
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वर्ष 2024 में 1209.3 मिमी (96 प्रतिशत) तथा वर्ष 2025 में 1301.9 मिमी (99 प्रतिशत) बारिश दर्ज की गई थी प्रशासन का कहना है कि जल प्रबंधन के कड़े फैसले समय रहते इसलिए लिए जा रहे हैं ताकि अल नीनों के प्रभाव से पैदा होने वाली किसी भी स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके, नागरिकों और किसानों से भी पानी का उपयोग सोच-समझकर करने की अपील की जा रही है।