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पालकमंत्री डॉ. पंकज भोयर ने पेयजल और खेती के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने हेतु तत्काल नियोजन के निर्देश दिए।
तहसील स्तरीय समितियां जनप्रतिनिधियों के साथ चर्चा कर सूखा राहत के प्रस्ताव तैयार करेंगी।
सूखाग्रस्त तहसीलों में विद्यार्थियों की शिक्षा और परीक्षा फीस माफ करने तथा निजी स्कूलों में भी नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
Bhandara District Administration: भंडारा जिले में सूखे की स्थिति को देखते हुए नागरिकों को पीने और खेती के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की दिशा में तत्काल नियोजन किया जाए। सूखा निवारण के लिए गठित तहसील स्तरीय समितियां जनप्रतिनिधियों के साथ चर्चा कर आवश्यक प्रस्ताव तैयार करें और उन्हें जिलाधिकारी कार्यालय में प्रस्तुत करें, ताकि सूखे और जलसंकट से निपटने के लिए राज्य सरकार को सटीक कार्ययोजना भेजी जा सके। यह निर्देश पालकमंत्री डॉ. पंकज भोयर ने जिलाधिकारी कार्यालय में आयोजित बैठक में दिए।
पालकमंत्री ने कहा कि, सूखाग्रस्त घोषित तहसीलों के विद्यार्थियों की शिक्षा एवं परीक्षा फीस माफ करने के साथ ही निजी स्कूलों में भी शासन के नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए। शासन निर्णय में उल्लिखित सभी उपाययोजनाओं को संबंधित विभाग प्रभावी ढंग से लागू करें, ताकि सूखाग्रस्त नागरिकों को आवश्यक सुविधाएं मिल सकें। बैठक में सांसद डॉ. प्रशांत पडोले, विधायक परिणय फुके, नरेंद्र भोंडेकर, अविनाश ब्राह्मणकर, राजू कारेमोरे और राजेंद्र जैन, नगराध्यक्ष मधुरा मदनकर, जिलाधिकारी सावन कुमार तथा जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मिलिंद कुमार साल्वे सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
डॉ. भोयर ने सूखा निवारण के लिए 29 और 30 अक्टूबर को जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में तालुकास्तरीय समितियों की बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए। इन बैठकों में आवश्यक प्रस्ताव तैयार कर तत्काल जिलास्तरीय समिति को भेजे जाएं, ताकि आगे की कार्रवाई में देरी न हो। उन्होंने सूखाग्रस्त तहसीलों में फसल ऋणों का पुनर्गठन करने, किसी भी प्रकार की कर्ज वसूली नहीं करने, निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा पर्याप्त मात्रा में खाद्यान्न उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।
जिले के तालाबों का गहरीकरण करने और उनमें जमा गाद निकालने संबंधी प्रस्ताव अगले आठ दिनों के भीतर शासन को प्रस्तुत करने के निर्देश जिला नियोजन अधिकारी को दिए गए। इसके अलावा नगरपालिका क्षेत्रों के कुओं और बोरवेल तथा ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी कुओं की वर्तमान स्थिति और जल उपलब्धता की जानकारी एकत्रित करने को कहा गया।
पानी की संभावित कमी को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जलसंकट दूर करने की ठोस योजना तैयार कर उसकी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी जाए। तहसीलदारों की अध्यक्षता में तहसील स्तरीय समितियों की बैठकें आयोजित कर शासन के निर्णय में शामिल सभी प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। बैठक में उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने भी जलसंकट से निपटने के लिए विभिन्न उपाय सुझाए और चर्चा में भाग लिया।