Bhandara Workers Pending Wages: महाराष्ट्र मिनरल कॉर्पोरेशन के अंतर्गत दहेगांव कायनाइट माइन्स के मजदूरों का हक और मेहनत का पैसा पिछले दो दशकों से अधिक समय से लटका हुआ है। कामगारों की बकाया मजदूरी, भत्ते और ग्रेच्युटी राशि का भुगतान श्रम न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बावजूद अब तक पूर्ण रूप से नहीं किया गया है।
लगातार प्रशासनिक उपेक्षा से त्रस्त आकर मजदूरों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है। कामगारों ने प्रशासन को कड़ा चेतावनी पत्र सौंपते हुए कहा है कि यदि 26 नवंबर तक उनकी जायज मांगों का समाधान नहीं हुआ, तो वे संविधान दिवस के अवसर पर लाखांदुर तहसील कार्यालय के समक्ष अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठने को मजबूर होंगे।
भंडारा स्थित श्रम न्यायालय (कामगार न्यायालय) ने 10 मार्च 2003 को ही मधुकर डोमन खोब्रागड़े तथा उनके अन्य साथी कामगारों के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। अदालत ने कंपनी की चल-अचल संपत्ति अथवा कानूनन जिम्मेदार व्यक्तियों से पूरी बकाया राशि व्याज सहित वसूल कर मजदूरों को सौंपने का सख्त निर्देश दिया था। दुर्भाग्यवश, न्यायिक आदेश पारित होने के 23 वर्ष बीत जाने के बाद भी प्रशासन और संबंधित विभाग इस आदेश का कड़ाई से पालन कराने में पूरी तरह विफल साबित हुए हैं।
कामगारों का आरोप है कि उन्होंने अपनी गाढ़ी कमाई और हक का पैसा हासिल करने के लिए बीते दो दशकों में अनगिनत बार पत्राचार किया, मंत्रियों से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर काटे और लगातार गुहार लगाई। हर बार उन्हें केवल कोरे आश्वासन देकर टाल दिया गया। जीवन भर खदानों में खून-पसीना बहाने के बाद वृद्ध अवस्था में भी अपने पैसों के लिए भटकना मजदूरों और उनके परिवारों के लिए अत्यंत पीड़ादायक और चिंताजनक स्थिति बन गई है।
श्रम न्यायालय के 10 मार्च 2023 के आदेश को तत्काल प्रभाव से अमल में लाया जाए।। मधुकर डोमन खोब्रागड़े सहित सभी पीड़ित मजदूरों की बकाया मजदूरी, भत्ते और ग्रेच्युटी की संपूर्ण राशि ब्याज सहित तुरंत प्रदान की जाए, कानूनी प्रावधानों का उपयोग कर महाराष्ट्र मिनरल कॉर्पोरेशन व दहेगांव कायनाइट माइन्स की संपत्तियों को कुर्क की जाए।
संविधान दिवस से आंदोलन का ऐलान पीड़ित मजदूरों में मधुकर खोब्रागडे, रायभान नवले, माणिक कांबले, मुखलू कांबले, महानंदा कांबले, कांता कांबले और पारबता हनवते सहित अन्य श्रमिकों ने साफ किया है कि अब उनके सब्र का बांध टूट चुका है। यदि 26 नवंबर तक प्रशासन की ओर से कोई संतोषजनक ठोस कार्रवाई नहीं की जाती, तो तहसील कार्यालय के समक्ष आमरण अनशन शुरू किया जाएगा।
आंदोलन के दौरान यदि किसी भी मजदूर के स्वास्थ्य या जीवन को क्षति पहुंचती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन और शासन की होगी। फिलहाल 23 वर्षों से लटके इस मानवीय और गंभीर श्रम मामले पर अब लाखांदूर तहसील और संपूर्ण भंडारा जिले की नजरें टिकी हुई है कि क्या प्रशासन समय रहते जागता है या फिर वृद्ध मजदूरों को अनशन के कड़े मार्ग पर उतरना पड़ेगा।