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जनवरी से अक्टूबर 2026 के दौरान भंडारा ACB ने जिले में 7 अलग-अलग स्थानों पर जाल बिछाकर कार्रवाई की।
रिश्वतखोरी के मामलों में कुल 9 सरकारी अधिकारी और कर्मचारी कथित तौर पर रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े गए।
करडी और भंडारा शहर पुलिस थानों से जुड़े दो मामलों में तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
Bhandara Bribery Cases: भंडारा जिले के विभिन्न शासकीय विभागों में प्रशासनिक पारदर्शिता और जनसेवा के दावों पर भ्रष्टाचार की दीमक हावी होती दिखाई दे रही है। आम नागरिकों से सरकारी कामकाज के एवज में रिश्वत वसूलने वाले कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) भंडारा ने सख्त रुख अपनाया है। आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से अक्टूबर 2026 तक बीते 10 महीनों के भीतर एसीबी की टीम ने जिले में कुल 7 अलग-अलग स्थानों पर जाल बिछाकर 9 भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोचा है।
पुलिस महकमे से जुड़े मामलों की बात करें तो इस दौरान 2 अलग-अलग कार्यवाहियों में 3 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए। करडी पुलिस थाने में तैनात हवलदार प्रफुल्ल वालदे पर दर्ज अपराध में धाराएं हल्की करने और आरोपी को राहत पहुंचाने के नाम पर 10 हजार रुपए की रिश्वत मांगने का संगीन आरोप लगा। इसके अलावा भंडारा शहर पुलिस थाने के सहायक पुलिस निरीक्षक रमेश खाडे तथा पुलिस सिपाही रवीकुमार आडे के खिलाफ भी रिश्वतखोरी के मामले दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की गई।
अन्य विभागों में भी भ्रष्टाचार के मामले सामने आए हैं। संपत्ती एवं सेवा कर (जीएसटी) विभाग में पदस्थ राज्य कर निरीक्षक मनीष सहारे को 35 हजार रुपए की भारी-भरकम रिश्वत लेते हुए एसीबी की टीम ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया। वहीं लाखनी स्थित सेतु सुविधा केंद्र के संचालक सतीश मोटघरे को नागरिकों से विभिन्न शासकीय प्रमाणपत्र जारी करने की एवज में 11 हजार रुपए की अवैध मांग करने और राशि स्वीकार करने के आरोप में पकड़ा गया।
जिला परिषद स्वास्थ्य विभाग में हुए तबादला घोटाले ने भी काफी सुर्खियां बटोरीं। जिला स्वास्थ्य प्रशिक्षण केंद्र में तबादले का आदेश रद्द करवाकर पुरानी जगह पर ही पदस्थापना बनाए रखने के बदले 25 हजार रुपए की रिश्वत मांगने के जुर्म में चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजीव नैताम तथा स्वास्थ्य सहायक प्रवीण बडवाईक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई।
वन विभाग में भी घूसखोरी का खेल उजागर हुआ, जहां सोनेगांव स्थित वन परिक्षेत्र कार्यालय के सामने बांस कटाई करने वाले मजदूरों पर दंडात्मक कार्रवाई न करने के एवज में 5 हजार रुपए की घूस ले रहे वनरक्षक चित्तरंजन राधेश्याम कोरे को रंगे हाथों पकड़ा गया। इसके साथ ही जिला परिषद के अंतर्गत आने वाले एक ग्राम सेवक के खिलाफ भी एसीबी की ओर से कार्रवाई अमल में लाई गई है।
भंडारा एसीबी पुलिस उपअधीक्षक प्रवीणकुमार पाटिल ने कहा कि सरकारी कामकाज के बदले अवैध वसूली करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर शिकंजा कसने के लिए नागरिकों से आगे आना चाहिए। कानून के तहत रिश्वत लेना और देना दोनों ही गंभीर एवं दंडनीय अपराध है।
यदि कोई भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी किसी वैध कार्य को पूरा करने के एवज में रिश्वत की मांग करता है, तो आम नागरिकों को डरने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है। नागरिक बिना किसी संकोच के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1064 पर संपर्क कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं, ताकि ऐसे भ्रष्ट तत्वों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई कर उन पर नकेल कसी जा सके।