Housing Units Stalled (सोर्सः सोशल मीडिया) 
भंडारा

61,000 से अधिक घरकुल अटके, प्रशासनिक उदासीनता और रेत संकट से लाभार्थियों को झटका

Bhandara Housing Scheme: भंडारा जिले में प्रशासनिक उदासीनता और रेत संकट के कारण 61,000 से अधिक घरकुल अधूरे हैं, जिससे हजारों लाभार्थियों का ‘सबके लिए आवास’ सपना अटका हुआ है।

आंचल लोखंडे

Maharashtra Sand Shortage: भंडारा जिले की गरीब जनता का ‘सबके लिए आवास’ का सपना प्रशासनिक ढुलमुल रवैये के कारण अधर में लटक गया है। केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न आवास योजनाएं जिले में लागू हैं, लेकिन फरवरी 2026 के अंत तक के आंकड़ों के अनुसार जिले में 61,576 आवास (घरकुल) का निर्माण कार्य पूरी तरह ठप पड़ा है।

जिले में कुल 1,50,458 आवासों को मंजूरी मिली थी, जिनमें से केवल 93,071 घरों का निर्माण पूरा हो सका है। शेष 61 हजार से अधिक लाभार्थियों के लिए अपने पक्के घर की छत अब भी अधूरा सपना बनी हुई है।

अनुदान भी नहीं मिल रहा

इसके साथ ही अनुदान वितरण की धीमी गति भी बड़ी बाधा बन रही है। निर्माण के चरणों के अनुसार मिलने वाला अनुदान लाभार्थियों के बैंक खातों में समय पर जमा नहीं हो रहा है। सीमेंट, ईंट और मजदूरी का भुगतान न होने से कई जगह काम बंद पड़ गया है। वहीं, पिछले महीने तहसील स्तर पर कर्मचारियों की बेमियादी हड़ताल ने भी योजनाओं के क्रियान्वयन को बुरी तरह प्रभावित किया।

निर्माण कार्य बुरी तरह प्रभावित

अनुदान की किस्तों पर नजर डालें तो प्रधानमंत्री आवास योजना में पहले चरण के लिए 1,12,390 लाभार्थियों को निधि मिली, लेकिन चौथे चरण तक आते-आते यह संख्या घटकर मात्र 59,900 रह गई। अब जिले के गरीब लाभार्थियों ने प्रशासन से मांग तेज कर दी है कि रेत की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और अनुदान वितरण में आने वाली बाधाओं को तत्काल दूर किया जाए।

नहीं मिल रही मुफ्त रेत

निर्माण कार्य रुकने की जमीनी स्थिति काफी निराशाजनक है। मुफ्त रेत डिपो के नाम पर नीतियां तो बनाई गईं, लेकिन धरातल पर रेत उपलब्ध नहीं होने से कई आवासों का काम दीवार स्तर पर ही रुक गया है। रेत घाटों पर प्रतिबंध के कारण आम लाभार्थियों को रेत नहीं मिल रही, जिसका फायदा रेत माफिया उठा रहे हैं और मनमाने दामों पर अवैध रूप से रेत बेच रहे हैं।

सभी योजनाएं प्रभावित

विभिन्न योजनाओं के आंकड़ों से स्थिति की गंभीरता स्पष्ट होती है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत 1,15,935 घरों में से 53,545 का निर्माण अधूरा है। इसी प्रकार रमाई आवास योजना के 3,914, शबरी आवास योजना के 1,049, मोदी आवास योजना के 2,174 और यशवंतराव चव्हाण मुक्त वस्ती योजना के 894 घरों का काम अटका हुआ है।

तहसीलों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में तुमसर तहसील 16,040 घर बनाकर जिले में अव्वल है, जबकि पवनी तहसील केवल 7,277 घरों के साथ सबसे पीछे है। रमाई आवास योजना में भंडारा तहसील ने 1,909 घर बनाकर बेहतर प्रदर्शन किया है, जबकि मोहाड़ी तहसील महज 820 घरों के साथ काफी पिछड़ी हुई है। यशवंतराव चव्हाण योजना में भी साकोली आगे और मोहाड़ी पीछे है।

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