भंडारा सफाई कर्मचारी आंदोलन (सोर्सः सोशल मीडिया)
भंडारा

बिना सूचना अचानक काम से निकाले गए कर्मी, भंडारा में 59 संविदा सफाई कर्मचारियों का अनिश्चितकालीन धरना

Bhandara Sanitation Workers Protest: भंडारा नगर परिषद के 59 संविदा सफाई कर्मचारियों को काम से हटाने के विरोध में अनिश्चितकालीन धरना शुरू हुआ है। कर्मचारी वेतन-सामाजिक सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।

आंचल लोखंडे

Bhandara Contract Sanitation Workers: भंडारा नगर परिषद में पिछले 10 से 15 वर्षों से ठोस कचरा संग्रहण और स्वच्छता का कार्य कर रहे 59 संविदा सफाई कर्मचारियों को अचानक काम से हटाए जाने के विरोध में स्वतंत्र म्युनिसिपल कंत्राटी कामगार यूनियन ने आक्रामक रुख अपना लिया है।

प्रभावित कामगारों को तुरंत काम पर वापस लेने की मांग को लेकर शुक्रवार से जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना आंदोलन शुरू कर दिया गया है। संगठन का आरोप है कि विभागीय सहआयुक्त की ओर से दिए गए स्पष्ट निर्देशों के बावजूद नगर परिषद प्रशासन ने अब तक इस पर कोई अमल नहीं किया है।

बिना नोटिस के नौकरी से निकालने का आरोप

यूनियन के अनुसार, लंबित मांगों को लेकर सफाई कर्मचारियों ने 17 सितंबर को एक दिवसीय हड़ताल की थी, जिसकी लिखित सूचना 31 अगस्त को ही दे दी गई थी। हालांकि, मांगों का समाधान करने के बजाय आंदोलन की पृष्ठभूमि में 59 कर्मचारियों को बिना किसी पूर्व सूचना, कारण बताओ नोटिस या सुनवाई का अवसर दिए अचानक काम से निकाल दिया गया। इसके अतिरिक्त, राजीव भगत का ठेका रद्द कर 16 सितंबर को इकराम पठान को नया ठेका सौंप दिया गया।

प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना पर बढ़ता जा रहा रोष

विभागीय सहआयुक्त रवींद्र भेलावे ने 28 सितंबर को पत्र जारी कर सभी 59 कामगारों को पुनः काम पर बहाल करने के निर्देश दिए थे। परंतु, स्थानीय प्रशासन की ओर से इस आदेश की अनदेखी किए जाने से कर्मचारियों में भारी असंतोष व्याप्त है।

यह आंदोलन स्वतंत्र म्युनिसिपल कंत्राटी कामगार यूनियन के कार्याध्यक्ष व कानूनी सलाहकार एड. नरेंद्र गोंडाने के नेतृत्व में किया जा रहा है, जिसमें यूनियन अध्यक्ष रवींद्र सूर्यवंशी, महासचिव अमित खरात, शाखा अध्यक्ष राजकुमार साकोरे, शाखा महासचिव लोकेश उकरे, उपाध्यक्ष जितेंद्र बर्वेकर, परवेज शेख, सहसचिव अमित नान्हे, संगठन सचिव राजेश भूरे, कोषाध्यक्ष आशीष भूरे समेत अमर बावने, खेमलाल कावडे, तुलसीदास बर्वेकर, राकेश उकरे, ज्ञानेश्वर वाघाये और बड़ी संख्या में सफाई कर्मचारी उपस्थित हैं।

वेतन और सामाजिक सुरक्षा की मांग

संविदा सफाई कर्मचारी वर्ष 2025 से ही न्यूनतम वेतन, नियमित भुगतान, साप्ताहिक अवकाश, ओवरटाइम, सुरक्षा उपकरण और सामाजिक सुरक्षा लाभों की मांग को लेकर नगर परिषद प्रशासन और सहायक श्रम आयुक्त कार्यालय में लगातार गुहार लगा रहे हैं। संगठन का कहना है कि ठेकेदार बदलने के बावजूद शहर में सफाई कार्य जारी है, ऐसे में वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे स्थानीय कर्मचारियों को रोजगार से बेदखल करना सरासर अन्याय है।

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