Bhandara Drought, Farmer Relief: राज्य सरकार ने बारिश में कमी और सूखे के विभिन्न सूचकांकों के आधार पर भंडारा जिले की भंडारा, पवनी और लाखांदूर तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है।
तुमसर, मोहाड़ी, साकोली और लाखनी सूची से बाहर हैं। जिले में जून से सितंबर 2026 के दौरान सामान्य 1,157 मिमी के मुकाबले 849.5 मिमी यानी 73.4 प्रतिशत बारिश हुई।
भंडारा बारिश में कमी, लंबे अंतराल और सूखे के विभिन्न सूचकांकों के आधार पर राज्य सरकार ने राज्य की 358 में से 265 तहसीलों में ट्रिगर-1 लागू कर सूखाग्रस्त स्थिति घोषित की है। इसमें भंडारा जिले की भंडारा, पवनी और लाखांदूर तहसीलों को शामिल किया गया है।
वहीं तुमसर, मोहाड़ी, साकोली और लाखनी तहसीलों को इस सूची से बाहर रखा गया है। बारिश में कमी का असर खरीफ फसलों पर भी दिखाई दे रहा है। जिले में खरीफ फसलों की बुआई का रकबा बड़ा होने के बावजूद खड़ी फसलों पर जल संकट मंडरा रहा है।
जून से सितंबर 2026 के दौरान भंडारा जिले में औसतन 1,157 मिमी बारिश अपेक्षित थी, लेकिन अब तक केवल 849.5 मिमी यानी 73.4 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई है। तहसीलवार बारिश में भी काफी अंतर देखने को मिला है।
पवनी में 696 मिमी यानी 62.1 प्रतिशत, लाखांदूर में 797.8 मिमी यानी 74.2 प्रतिशत और भंडारा में 847.1 मिमी यानी 73.8 प्रतिशत बारिश हुई है। तुमसर में 838.5 मिमी (77.7%), मोहाड़ी में 878.2 मिमी (83.7%), लाखनी में 919.3 मिमी (85.2%) और साकोली में 1,137.4 मिमी (90.7%) बारिश दर्ज की गई।
जिले की सातों तहसीलों में कुल 1,98,462.59 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुआई की गई है। धान की रोपाई का लक्ष्य 1,74,985 हेक्टेयर था, जबकि इसके मुकाबले 1,83,184.21 हेक्टेयर यानी 105 प्रतिशत क्षेत्र में रोपाई की गई है। हालांकि बारिश की कमी के कारण अब फसलों के लिए पानी की उपलब्धता चिंता का विषय बनी हुई है।
जिले के जलस्रोतों में भी अपेक्षाकृत कम जलसंग्रह दर्ज किया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 59 तालाबों और जल परियोजनाओं में कुल 72.24 प्रतिशत जलसंग्रह उपलब्ध है। खानधड़ी परियोजना में 36.70 प्रतिशत, मध्यम परियोजनाओं में 59.70 प्रतिशत, लघु परियोजनाओं में 68.89 प्रतिशत और पूर्व मालगुजारी तालाबों में 19.30 प्रतिशत जलसंग्रह बताया गया है।
जिलाधिकारी सावन कुमार ने कहा कि सूखाग्रस्त स्थिति की वस्तुनिष्ठ समीक्षा के आधार पर पंचनामा कार्रवाई जल्द पूरी की जाएगी। फसलों का प्रत्यक्ष निरीक्षण, नुकसान की प्रविष्टि और किसानों को आवश्यक सहायता के साथ पेयजल, चारा और रोजगार से जुड़े उपायों के लिए संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं।
सूखाग्रस्त घोषित तहसीलों में भू-राजस्व में छूट, फसल ऋण का पुनर्गठन, कृषि ऋण वसूली पर रोक, कृषि पंपों के बिजली बिल में राहत, परीक्षा शुल्क में छूट, मनरेगा के कामों में तेजी, जरूरत के अनुसार टैंकरों से पानी और चारे की व्यवस्था जैसी राहत दी जाएगी। फसल नुकसान का वित्तीय मुआवजा पंचनामा प्रक्रिया पूरी होने के बाद घोषित किया जाएगा।