Highlights:
भंडारा शहर के सभी वैध नल कनेक्शनों पर AMR तकनीक आधारित स्वचालित स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे।
जीएसटी सहित परियोजना की कुल लागत 20 करोड़ रुपए है। इसका ठेका नागपुर की CSTech कंपनी को दिया गया है।
मौजूदा उपभोक्ताओं से मीटर लगाने और रखरखाव के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।
Bhandara Municipal Council: भंडारा शहर में लंबे समय से चली आ रही अनियमित जलापूर्ति और जल कर निर्धारण की असंतुलित प्रणाली को दुरुस्त करने के लिए भंडारा नगर परिषद ने एक नीतिगत फैसला लिया है। शहर के सभी क्षेत्रों में जल वितरण को पारदर्शी बनाने और पानी की बर्बादी पर प्रभावी अंकुश लगाने के मकसद से 11,500 नल कनेक्शनों पर अत्याधुनिक एएमआर (ऑटोमेटेड मीटर रीडिंग) प्रणाली पर आधारित स्वचलित स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे।
जीएसटी सहित 20 करोड़ रुपए की कुल लागत वाले इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का ठेका नागपुर की प्रसिद्ध एजेंसी 'सीएसटेक' को दिया गया है। नगर परिषद प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शहर के सभी वैध जल उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर लगवाना अनिवार्य होगा।
इस योजना के तहत नगर परिषद ने आम नागरिकों की जेब का खास ख्याल रखा है। पुराने उपभोक्ताओं से मीटर लगाने के लिए कोई भी अतिरिक्त शुल्क या रखरखाव व्यय नहीं लिया जाएगा।
वहीं, भविष्य में नया नल कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं को दिए जाने वाले 4,000 रुपए के निर्धारित आवेदन शुल्क में ही स्मार्ट मीटर की कीमत शामिल रहेगी। वर्तमान व्यवस्था में कई इलाकों में मीटर ना होने -या पुराने मीटरों के बंद पड़े रहने के कारण औसतन 210 रुपए प्रति तिमाही की दर से बिल वसूला जाता है। इससे राजस्व का नुकसान हो रहा है।
नगर परिषद के अभियंता निखिल तट्टे ने कहा कि एएमआर मीटर प्रणाली लागू करने का मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण को बढ़ावा देना और राजस्व प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाना है। दीपावली समाप्त होते ही ठेकेदार की ओर से वार्ड वार मीटर लगाने का कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।
नगर परिषद के वरिष्ठ अभियंता रणजीत बिसेन ने बताया कि जलापूर्ति योजना का बुनियादी ढांचागत निर्माण कार्य भी अपने अंतिम चरण में है। मुख्य और सहायक वितरण पाइपलाइनों को जोड़ने का काम पूरा होते ही संपूर्ण प्रणाली का ट्रायल रन लिया जाएगा, जिसके बाद शहरवासियों को सुचारू जल आपूर्ति मिलने लगेगी।
इस 20 करोड़ की योजना को लेकर नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कई प्रमुख वार्ड़ो में अभी भी नलों में पर्याप्त दबाव के साथ पानी नहीं पहुंच पा रहा है।
कई रिहाइशी इलाकों में नागरिकों को मटमैले और अशुद्ध पेयजल की समस्या से जूझना पड़ रहा है। नागरिकों का तर्क है कि जब नलों में नियमित और स्वच्छ पानी ही उपलब्ध नहीं है, तो पानी का माप करने वाले महंगे स्मार्ट मीटर लगाने की इतनी हड़बड़ी क्यों दिखाई जा रही है?