

Highlights:
बंगाल की खाड़ी में इतने अधिक चक्रवात आने के तीन मुख्य कारण है।
बंगाल की खाड़ी में अरब सागर से कहीं ज्यादा चक्रवात आते है।
जलवायु परिवर्तन के बीच अरब सागर में चक्रवातों की गतिविधि भी बढ़ी है।
Cyclonic Storm Murasu: अक्टूबर के अंत में बंगाल की खाड़ी में 'चक्रवात अर्नब' नामक एक शक्तिशाली तूफान बना। यह एक अत्यंत भीषण चक्रवाती तूफान में बदल गया, जिसमें हवा की गति 125-135 किमी/घंटा और झोंकों के साथ 150 किमी/घंटा तक पहुंच गई। यह आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ रहा है, जो यानम (पुडुचेरी), बापटला और विशाखापत्तनम के पास रहा। छह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने भारी बारिश और तेज हवाओं को दौर देखने को मिला।
पिछले अर्नब चक्रवात (Arnab Cyclone) के पस्त पड़ते ही बंगाल की खाड़ी में एक और बड़ा मौसमी संकट खड़ा हो गया है। दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी में बना गहरा दबाव का क्षेत्र अब चक्रवाती तूफान में बदल चुका है। मौसम विभाग के अनुसार, एक हफ्ते के भीतर आया यह दूसरा भीषण चक्रवाती तूफान मुरासु (Severe Cyclonic Storm Murasu) 2 नवंबर की रात आंध्र प्रदेश के तट से टकराएगा।
मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, मुरासु चक्रवात ओडिशा, बंगाल, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु को आने वाले समय में चक्रवातों की बढ़ती तीव्रता को देखते हुए स्थायी रूप से अत्यधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। लेकिन समझने वाली बात है कि चक्रवात बनता कैसे है? साथ ही सवाल यह भी उठता है कि बंगाल की खाड़ी में ही सबसे ज्यादा चक्रवात बनते है। आइए इसे विस्तार से समझते है।
चक्रवात बादलों, बारिश और हवा का एक विशाल घूमता हुआ स्तंभ होता है, जो समुद्र के गर्म पानी के ऊपर बनता है। इसकी शुरुआत तब होती है जब समुद्र के ऊपर एक छोटे से क्षेत्र में हवा का दबाव कम हो जाता है। आस-पास की हवा इस कम दबाव वाले क्षेत्र की ओर दौड़ती है। चक्रवात बनने के लिए समुद्र का पानी लगभग 50 मीटर की गहराई तक कम से कम 26.5°C गर्म होना चाहिए।
समुद्र का गर्म पानी भाप बनकर नम हवा में बदल जाता है और वायुमंडल में ऊपर उठता है। समुद्र से काफी ऊपर, यह नमी ठंडी होकर बारिश वाले बादलों में बदल जाती है और गर्मी छोड़ती है। इससे हवा का दबाव और कम हो जाता है, जिससे और अधिक हवा अंदर की ओर खिंची चली आती है।
कम 'विंड शियर' यानी ऊपरी हवाओं का शांत होना। चक्रवात को विकसित होने के लिए, तूफान के ऊपरी हिस्से में हवा की गति बहुत तेज नहीं होनी चाहिए, और न ही यह समुद्र की सतह के पास चलने वाली हवाओं से अलग दिशा में होनी चाहिए। अगर ऊपरी हवाएं बहुत तेज चलती हैं, तो वे तूफान के स्तंभ को पूरी तरह विकसित होने से पहले ही बिखेर देती हैं।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अरब सागर में बनने वाले हर एक चक्रवात की तुलना में बंगाल की खाड़ी में चार गुना चक्रवात आते हैं।
इसके तीन मुख्य कारण हैं:
पूर्व से आने वाली 'शुरुआती' लहरें: उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में हर कुछ दिनों में पूर्व से पश्चिम की ओर हवा की कमजोर लहरें (ईस्टरली वेव्स) चलती हैं। ये कम दबाव वाले ऐसे क्षेत्र बनाती हैं जो गर्म पानी के ऊपर चक्रवात का रूप ले सकते हैं।
प्रशांत महासागर के बचे हुए तूफान (टाइफून): प्रशांत महासागर में आने वाले शक्तिशाली तूफान (जिन्हें टाइफून कहा जाता है) दक्षिण-पूर्व एशिया की ओर बढ़ते हैं। भले ही जमीन पर पहुंचकर ये कमजोर हो जाते हैं, लेकिन इनकी बची हुई घूमती हुई हवाएं बंगाल की खाड़ी के गर्म पानी में पहुंचकर फिर से सक्रिय हो जाती हैं और नए चक्रवातों में बदल जाती हैं।
समुद्र के पानी का अधिक गर्म होना: अरब सागर की तुलना में बंगाल की खाड़ी का पानी काफी अधिक गर्म रहता है।
मानसून के दौरान, वायुमंडल के ऊपरी हिस्सों में विपरीत दिशाओं में चलने वाली तेज हवाएं 'विंड शियर' यानी हवा के बहाव में बड़ा अंतर पैदा करती हैं। यह स्थिति बनने वाले तूफानों को बड़ा होने से पहले ही तोड़ देती है। मानसून खत्म होने के बाद, दो खास स्थितियां बंगाल की खाड़ी को चक्रवातों का केंद्र बना देती हैं।
मानसून के दौरान, भारी बारिश और नदियों से आने वाला पानी बंगाल की खाड़ी की सतह पर मीठे पानी की एक मोटी परत बना देता है। चूंकि मीठा पानी हल्का और कम खारा होता है, इसलिए यह एक कंबल की तरह सतह पर टिका रहता है। यह समुद्र की गर्मी को नीचे ही रोक लेता है, जिससे सतह का तापमान 28°C से ऊपर बना रहता है।
जब कोई चक्रवात सामान्य समुद्री पानी के ऊपर घूमता है, तो उसकी तेज हवाएं गहरे समुद्र के ठंडे पानी को सतह पर ले आती हैं। इससे समुद्र का पानी ठंडा हो जाता है और तूफान कमजोर पड़ जाता है। लेकिन मानसून के बाद बंगाल की खाड़ी में गर्म पानी काफी गहराई तक होता है, और ऊपर मौजूद मीठे पानी की परत गहरे समुद्र के ठंडे पानी को ऊपर आने से रोकती है। नतीजतन, तूफान के नीचे समुद्र की सतह गर्म बनी रहती है, जिससे उसे लगातार ऊर्जा मिलती रहती है।
शोधकर्ताओं ने पाया कि 2001 से 2019 के बीच, समुद्र की सतह का तापमान बढ़ने के कारण अरब सागर में चक्रवातों की संख्या में 52% की वृद्धि हुई। इसके बावजूद, इस क्षेत्र में बंगाल की खाड़ी ही चक्रवातों का मुख्य केंद्र बनी हुई है। इस दौरान अरब सागर में 38 चक्रवात आए, जबकि बंगाल की खाड़ी में 62 चक्रवात दर्ज किए गए।