बिग बजट होगा नगर परिषद चुनाव का मुकाबला (सौजन्यः सोशल मीडिया) 
भंडारा

बिग बजट होगा नगर परिषद चुनाव का मुकाबला, उम्मीदवारों की खर्च सीमा भी बढ़ी, आक्रामक प्रचार के संकेत

Municipal Election Expense Limit: भंडार नगर परिषद चुनाव के लिए श्रेणीवार खर्च सीमा तय की गई है।अ श्रेणी में नगराध्यक्ष 15 लाख, ब श्रेणी 11.25 लाख और क श्रेणी 7.5 लाख तक खर्च कर सकेंगे।

आंचल लोखंडे

Bhandara News: नामांकन की अंतिम तारीख नजदीक आते ही जिले की नगर परिषदों में चुनावी माहौल गर्माने लगा है। इस बार प्रचार खर्च की सीमा में बड़ी बढ़ोतरी की गई है, और इसके बावजूद नगराध्यक्ष तथा नगरसेवक पदों के लिए बिग बजट खर्च की होड़ देखने को मिलेगी, ऐसे संकेत स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। बदलती आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लागू की गई नई खर्च सीमा न केवल उम्मीदवारों को आर्थिक राहत देगी, बल्कि प्रचार के स्वरूप में बदलाव और स्थानीय राजनीति के समीकरणों को भी गति प्रदान करेगी।

इस बार जिले में भंडारा, तुमसर, पवनी और साकोली-सेंदुरवाफा नगर परिषदों के चुनाव हो रहे हैं। कुल 49 प्रभागों में 100 नगरसेवक और 4 नगराध्यक्ष पदों के लिए मतदान होगा। भंडारा नगर परिषद में 17 प्रभागों से 35 सदस्य, तुमसर में 12 प्रभागों से 25 सदस्य, पवनी और साकोली-सेंदुरवाफा में 10-10 प्रभागों से 20 सदस्य चुने जाएंगे। चारों स्थानों पर स्थानीय राजनीतिक समीकरण, जातीय वोट-बैंक, प्रभागवार गणित और विभिन्न दलों की आंतरिक तैयारियों के चलते चुनाव अधिक संवेदनशील होते दिखाई दे रहे हैं।

प्रचार का दोहरा स्वरूप

स्थानीय स्वराज संस्था चुनाव में पारंपरिक प्रचार का महत्व अभी भी कायम है, लेकिन नई पीढ़ी का प्रभाव और डिजिटल माध्यमों का प्रसार इस चुनाव की तस्वीर बदल रहा है। वरिष्ठ और मध्यम आयु वर्ग के मतदाताओं के लिए घर-घर संपर्क, व्यक्तिगत मुलाकातें, छोटी-बड़ी सभाएं और रैलियां जैसे पारंपरिक तरीके जारी रहेंगे। इससे प्रचार का दोहरा स्वरूप और अधिक तीव्र होने की संभावना है।

चुनावी तंत्र के लिए इन गतिविधियों पर नजर रखना बड़ी चुनौती

हालांकि कानूनी रूप से प्रचार खर्च का विवरण दर्ज करना अनिवार्य है, लेकिन वास्तविकता में अप्रत्यक्ष खर्च चुनाव का एक बड़ा और जटिल पहलू बना हुआ है। कई प्रभागों में कड़े मुकाबले के चलते प्रचार वाहन, भोजन व्यवस्था, कार्यकर्ताओं का संचालन, विभिन्न कार्यक्रमों की संरचना और मतदाता संपर्क के विविध आयोजन महंगे सिद्ध हो रहे हैं। इन सभी पर होने वाला खर्च अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ सकता है। ऐसे में चुनावी तंत्र के लिए इन गतिविधियों पर नजर रखना बड़ी चुनौती होगी, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां स्थानीय दबाव समूह अधिक सक्रिय हैं।

प्रशासन की तैयारी और सतर्कता

जिला चुनाव निर्णय अधिकारियों के अनुसार, नई खर्च सीमा से उम्मीदवारों को प्रचार बेहतर ढंग से करने की सुविधा मिलेगी, लेकिन खर्च की निगरानी में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

सोशल मीडिया में बढ़ती प्रतिस्पर्धा

डिजिटल माध्यमों की ताकत को देखते हुए अधिकांश उम्मीदवार अपनी विशेष डिजिटल टीम गठित करने में लगे हैं। ग्राफिक्स निर्माण, वीडियो प्रोडक्शन, लाइव कार्यक्रम, वर्चुअल संवाद और पेड प्रमोशन जैसे क्षेत्रों में खर्च बढ़ना तय है। कुछ प्रभागों में डिजिटल प्रचार प्रत्यक्ष रूप से वोटों को प्रभावित करने वाला निर्णायक कारक बन सकता है, ऐसा राजनीतिक हलकों का अनुमान है।

श्रेणीनुसार खर्च सीमा

अ वर्ग नगर परिषद

  • नगराध्यक्ष: ₹15,00,000
  • नगरसेवक: ₹5,00,000

ब वर्ग नगर परिषद

क वर्ग नगर परिषद

  • नगराध्यक्ष: ₹7,50,000
  • नगरसेवक: ₹2,50,000

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