प्रतीका्मक तस्वीर ( सोर्स: सोसल मीडिया AI ) 
औरंगाबाद

बाइक गायब होने पर दोस्त का अपहरण, सिडको पुलिस ने 2 घंटे में फिल्मी स्टाइल में छुड़ाया

Bike Dispute kidnapping Case: संभाजीनगर बाइक चोरी के विवाद। दोस्त की बाइक गायब होने पर 7 युवकों ने 12वीं के छात्र का अपहरण कर लिया। CIDCO पुलिस ने  120 मिनट में छात्र को सकुशल छुड़ाकर सनसनी फैला दी।

अंकिता पटेल

CIDCO Police Station FIR: छत्रपति संभाजीनगर के सिडको इलाके में 2 जनवरी की रात एक सनसनीखेज वारदात सामने आई। यहाँ महज एक पुरानी बाइक गायब होने के विवाद में सात युवकों ने मिलकर अपने ही 17 वर्षीय नाबालिग दोस्त मयंक (12वीं का छात्र) का अपहरण कर लिया। घटना एन-6 बजरंग चौक क्षेत्र में रात करीब 10.30 बजे हुई, जब मयंक अपने मित्र आर्यन के साथ स्कूटी से जा रहा था।

फिल्मी अंदाज में कार में किया अगवा

जानकारी के अनुसार, जब मयंक और आर्यन बजरंग चौक से गुजर रहे थे, तभी पीछे से आए दो युवकों ने मयंक की शर्ट खींचकर उसे गिरा दिया। संतुलन बिगड़ने से दोनों गिर पड़े, तभी मौके पर एक कार (MH-20-HH-4668) पहुँची। कार में सवार पाँच युवकों और दोपहिया पर आए दो अन्य साथियों ने मिलकर मयंक को जबरन कार में ठूंस दिया और मौके से फरार हो गए। आर्यन ने तुरंत इस घटना की सूचना मयंक के परिजनों को दी, जिसके बाद सिडको पुलिस थाने में हड़कंप मच गया।

पुलिस की जांबाजी: 2 घंटे में वालूज से रेस्क्यू

घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस निरीक्षक अतुल येरमे के मार्गदर्शन में एक विशेष टीम गठित की गई। तकनीकी सर्विलांस और मुखबिरों की मदद से पुलिस ने आरोपियों का पीछा किया। पुलिस की मुस्तैदी का ही परिणाम था कि अपहरण के महज 2 घंटे के भीतर वालूज क्षेत्र से मयंक को सकुशल छुड़ा लिया गया। पुलिस ने मौके से तीन मुख्य आरोपियों विवेक सोनवणे (19), पांडुरंग सोनवणे (21) और रोहन ढवले (19) को गिरफ्तार कर लिया।

बाइक के लेन-देन से उपजा था विवाद

पूछताछ में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि आरोपी रोहन ने 4-5 महीने पहले अपनी बाइक मयंक को दी थी। मयंक ने वह बाइक अपने किसी अन्य मित्र यश को दे दी, जो उसे लेकर गायब हो गया।

रोहन लगातार मयंक पर अपनी बाइक वापस करने या पैसे देने का दबाव बना रहा था। जब बात नहीं बनी, तो आरोपियों ने मयंक को सबक सिखाने के लिए अपहरण की साजिश रच डाली।

अदालत ने भेजा पुलिस हिरासत में

गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें 6 जनवरी तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब इस मामले में शामिल अन्य चार फरार आरोपियों की तलाश कर रही है। इस सफल कार्रवाई में उपनिरीक्षक अनिल नाणेकर, शेवाले, मंगेश पवार और उनकी टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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