Disabled Woman Shop Demolished: महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) से एक ऐसा वीडियो सामने आया है जिसने सोशल मीडिया पर संवेदनाओं का सैलाब ला दिया है। शहर में प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे 'अतिक्रमण हटाओ' अभियान के दौरान एक दिव्यांग महिला की छोटी सी मिट्टी के बर्तनों की दुकान को जेसीबी (JCB) से जमींदोज कर दिया गया। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद राजनीति और समाज के विभिन्न वर्गों से तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।
छत्रपति संभाजीनगर के गजानन मंदिर परिसर में नगर निगम का दस्ता अवैध अतिक्रमण हटाने पहुंचा था। वहां अर्चना पारखे नामक एक दिव्यांग महिला फुटपाथ के किनारे मिट्टी के बर्तन (मटके) बेचकर अपना और अपने परिवार का गुजारा करती थीं। प्रशासन की टीम ने बिना किसी मानवीय संवेदना के जेसीबी चलाकर उनकी पूरी दुकान नष्ट कर दी। वीडियो में देखा जा सकता है कि दुकान टूटने के बाद वह दिव्यांग महिला बेबस होकर जमीन पर बिखरे हुए मटकों के टुकड़ों को इकट्ठा करने की कोशिश कर रही है। उसकी आंखों में आंसू और चेहरे पर छाई लाचारी ने नेटिजन्स को आक्रोशित कर दिया है। लोगों का कहना है कि जब बड़े रसूखदारों के अतिक्रमण की बात आती है तो प्रशासन नरम पड़ जाता है, लेकिन एक गरीब और लाचार महिला के पेट पर लात मारने में जरा भी देरी नहीं की गई।
शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने इस घटना का वीडियो अपने सोशल मीडिया हैंडल पर साझा करते हुए सरकार और प्रशासन पर कड़ा प्रहार किया। राउत ने कहा, "यह अत्यंत क्रूर कृत्य है! ऐसे संवेदनहीन प्रशासन को क्रांति चौक पर खड़ा करके कोड़ों से मारना चाहिए।" उन्होंने राज्य सरकार की 'लाडकी बहिन योजना' पर तंज कसते हुए आगे कहा कि सरकार एक तरफ लाड़ली बहनों की बात करती है और दूसरी तरफ एक दिव्यांग बहन के चेहरे की वेदना उन्हें दिखाई नहीं देती।
दिव्यांगों के हक की लड़ाई लड़ने वाले नवनिर्वाचित विधायक बच्चू कडू ने भी इस घटना पर कड़ा रुख अपनाया है। खबर मिलते ही उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को तुरंत अर्चना पारखे की मदद के लिए भेजा। बच्चू कडू ने संबंधित अधिकारी को फोन लगाकर जमकर फटकार लगाई और स्पष्ट किया कि किसी भी दिव्यांग व्यक्ति की आजीविका पर प्रहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कडू ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि उक्त महिला के व्यवसाय के लिए तुरंत वैकल्पिक जगह और सहायता उपलब्ध कराई जाए।
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यह घटना एक बार फिर प्रशासन की लालफीताशाही और गरीब विरोधी रवैये को उजागर करती है। हालांकि प्रशासन इसे नियमों का पालन बता रहा है, लेकिन नागरिकों का सवाल है कि क्या नियम केवल निर्बलों के लिए ही होते हैं? फिलहाल, अर्चना पारखे को न्याय दिलाने के लिए सोशल मीडिया पर मुहिम तेज हो गई है।