प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया ) 
औरंगाबाद

छत्रपति संभाजीनगर: आंखों की गंभीर चोट, घाटी अस्पताल में आपात सर्जरी से बच्चों को मिला नया जीव

Sambhajinagar Eye Injury: खेलते समय आंखों में गंभीर चोट लगने से दो पांच वर्षीय बच्चों की रोशनी जाने का खतरा था। घाटी अस्पताल के नेत्र विशेषज्ञों ने समय पर सर्जरी कर दोनों की दृष्टि सुरक्षित की।

अंकिता पटेल

Sambhajinagar Child Accident: छत्रपति संभाजीनगर खेलते समय हुए हादसों में आंखों को गंभीर चोट लगने वाले पांच वर्ष के दो मासूम बच्चों की आंखों की रोशनी सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (घाटी) के नेत्र विभाग ने समय पर की गई सर्जरी से बचा ली है।

बच्चों की स्थिति फिलहाल स्थिर है व उनकी दृष्टि सुरक्षित बताई जा रही है। पहली घटना में एक बच्चा पेड़ के नीचे खेल रहा था, तभी इमली के पेड़ से गिरी इमली सीधा उसकी आंख में जा लगी।

जांच में पाया गया कि आंख के अंदर लकड़ी का टुकड़ा फंस गया था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत आपातकालीन सर्जरी कर वह टुकड़ा बेहद सावधानी से निकाला गया। दूसरी घटना में खेलते समय जमीन पर पड़ी लोहे की तार बच्चे की आंख में घुस गई, जिससे आंख की पुतली को गंभीर चोट पहुंची।

इस बच्चे को भी तुरंत सर्जरी की आवश्यकता पड़ी, डॉक्टरों के अनुसार, यदि दोनों मामलों में इलाज में जरा भी देरी होती, तो बच्चों को स्थायी रूप से दृष्टि खोने का खतरा था।

डॉ. अर्चना वरे की भूमिका रही अहम

अधिष्ठाता डॉ शिवाजी सुळे के मार्गदर्शन में नेत्र विभाग प्रमुख डॉ अर्चना वरे, डॉ तपन जक्कल, डॉ वेणुकुमार रंगू के सहयोग से कॉर्निया विशेषज्ञ डॉ महेश सोनपेठकर ने दोनों शल्य क्रियाएं सफलतापूर्वक की।

एनेस्थिसियोलॉजी विभाग की प्रमुख हॉ गायत्री तडवलकर के मार्गदर्शन में डॉ गणेश निकम, डॉ आमेर सैयद, डॉ नियति सेठी व डॉ आकाश ने अहम भूमिका निभाई।

इसके अलावा स्टाफ नर्स कालिंदी इघाटे, विकास गायकवाड, यमुना मुडे, सोनाली गायकवाड, गीता गीते व रूपाली रासने ने सहयोग दिया।

डॉक्टरों ने अभिभावकों से अपील की कि छोटे बच्चों को नुकीली वस्तुओं, लकड़ी की छड़ियों व लोहे की तारों वाली जगहों पर खेलने से रोकें।

बच्चों की आखों में होने वाली चोटें बेहद गंभीर हो सकती है, इसलिए विशेष सावधानी बरतना जरूरी है।

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