Sambhajinagar Pink E Rickshaw Scheme RTO Action: छत्रपति संभाजीनगर में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने व उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू की गई 'पिंक ई-रिक्शा' योजना अब अपने मूल उद्देश्य से भटकती नजर आ रही है। बड़ी संख्या में ऐसे पिंक ई-रिक्शा पुरुष चालकों की ओर से चलाए जाने के मामले सामने आने के बाद क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय ने सख्ती शुरू कर दी है।
अब यदि कोई पुरुष चलाते हुए पाया जाता है तो उसके खिलाफ जुर्माना व नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। वर्ष 2024 में पुणे, नाशिक, नागपुर, अहिल्यानगर, अमरावती, संभाजीनगर, कोल्हापुर व सोलापुर में यह पायलट परियोजना के रूप में शुरू की गई थी।
पहले चरण की सफलता के बाद इसे अन्य शहरों व नगर परिषद क्षेत्रों तक विस्तारित करने की तैयारी है। हालांकि कई मामलों में यह सामने आया है कि कागजों पर वाहन महिलाओं के नाम पर हैं, लेकिन वास्तविक संचालन उनके पति, भाई या पिता कर रहे हैं।
सरकार ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षण, वाहन खरीद पर अनुदान व परमिट की सुविधा दी, लेकिन कई स्थानों पर महिलाएं घर पर हैं व इसकी कमान पुरुषों ने संभाल रखी है। महिला एवं बाल विकास विभाग की इस योजना को जिले में अच्छी प्रतिक्रिया मिली।
शहर व ग्रामीण क्षेत्रों से अब तक 1,312 महिलाओं ने आवेदन किए। जांच के बाद 700 को पात्र घोषित किया गया, लेकिन प्रशासनिक मंजूरी मिलने के वावजूद अधिकांश लाभार्थियों को अब तक वाहन नहीं मिल पाए हैं।
योजना के तहत पात्र घोषित की गई महिलाएं फिलहाल बैंकों की जटिल ऋण स्वीकृति प्रक्रिया में फंसी हुई है। प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने के बावजूद ऋण मंजूरी में हो रही देरी से योजना की रफ्तार धीमी पड़ गई है।
परिणामस्वरूप अब तक केवल 35 ही पिक ई-रिक्शा उपलब्ध कराए जा सके हैं। शहर में दूसरे जिलों के पंजीकरण वाले ऑटो व ई-रिक्शाओं की बढ़ती आवाजाही को लेकर भी स्थानीय चालक नाराज है।
उनका कहना है कि अन्य जिलों के वाहन रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, अस्पताल व प्रमुख बाजारों में बड़े पैमाने पर यात्री परिवहन कर रहे हैं। इसको लेकर उन्होंने ऐसे वाहनों के फोटो एकत्रित करना भी शुरू कर दिया है व प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है।