Marathwada Water Scarcity: छत्रपति संभाजीनगर सहित पूरे मराठवाड़ा क्षेत्र में भीषण गर्मी के कारण जल संकट गहराने लगा है। तापमान में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने प्राकृतिक जलस्रोतों को सुखा दिया है, जिससे ग्रामीण इलाकों में पेयजल की गंभीर किल्लत पैदा हो गई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने क्षेत्र के 26 गांवों और 12 बस्तियों में 32 टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति शुरू कर दी है। राहत की बात यह है कि पिछले साल की तुलना में इस बार टैंकरों की मांग थोड़ी देर से शुरू हुई है, लेकिन आने वाले दिनों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण होने के आसार हैं।
पानी की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए विभिन्न जिलों में 74 निजी कुओं का अधिग्रहण किया है। विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, सबसे अधिक 38 कुएं संभाजीनगर जिले में अधिग्रहित किए गए हैं। इसके अलावा जालना में 13, हिंगोली में 13, और नांदेड़ व लातूर में 5-5 कुओं के माध्यम से जलापूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। वर्तमान में जो 32 टैंकर चल रहे हैं, उनमें 31 निजी और एक सरकारी टैंकर शामिल है, जो दिन-रात प्रभावित इलाकों में चक्कर लगा रहे हैं।
आंकड़ों पर नजर डालें तो जालना जिला वर्तमान में सबसे अधिक प्रभावित दिख रहा है। यहाँ 8 गांवों और 9 बस्तियों की प्यास बुझाने के लिए अकेले 17 टैंकर तैनात किए गए हैं। वहीं, छत्रपति संभाजीनगर जिले के 17 गांवों और 2 बस्तियों में 14 टैंकरों से सप्लाई की जा रही है। लातूर जिले में फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, जहाँ एक गांव और एक बस्ती के लिए केवल एक टैंकर की आवश्यकता पड़ रही है। अप्रैल के दूसरे सप्ताह से ही इन जिलों में संकट के बादल गहराने लगे हैं।
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शुरुआती बारिश पर्याप्त होने के बावजूद अप्रैल की तपिश ने भूजल स्तर को तेजी से नीचे धकेल दिया है। प्रशासन ने नागरिकों से पानी का संयमित और किफायती उपयोग करने की भावुक अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि यदि अभी से पानी की बचत नहीं की गई, तो मई और जून के महीनों में संकट और भी विकराल रूप ले सकता है। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए प्रशासन वैकल्पिक जलस्रोतों की भी तलाश कर रहा है ताकि किसी भी क्षेत्र में पानी की हाहाकार न मचे।