प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स : सोशल मीडिया ) 
औरंगाबाद

मराठवाड़ा मनपा चुनाव 3 शहरों में BJP, लातूर में कांग्रेस, परभणी में UBT का दबदबा; बदले सियासी समीकरण

Parbhani Municipal Corporation: मराठवाड़ा की 5 महानगरपालिकाओं के चुनाव नतीजों में BJP ने छत्रपति संभाजीनगर, जालना व नांदेड़ में जीत दर्ज की, लातूर में कांग्रेस व परभणी में शिवसेना (UBT) का दबदबा रहा।

अंकिता पटेल

Marathwada Municipal Election Results: छत्रपति संभाजीनगर मराठवाड़ा की जिले की पांच महानगरपालिकाओं के चुनाव परिणामों के नतीजे शुक्रवार, 16 जनवरी को घोषित किए गए, इसमें छत्रपति संभाजीनगर, जालना नांदेड़ मनपाओं में कमल खिला। लातूर में पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख की यादें नहीं मिटीं व जनता जनार्दन ने कांग्रेस को भारी बहुमत से विजयी बनाया।

वहीं, 65 सदस्य संख्या वाली परभणी मनपा में उद्धव बालासाहब ठाकरे पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सर्वाधिक 23 व पिछले चुनाव में सत्ता में रही कांग्रेस ने 12 सीटें जीतीं। मंत्री मेघना बोडर्डीकर कमाल दिखाने में नाकाम रहीं व उनकी अगुवाई में भाजपा 13 सीटों पर सिमट गई। राकां (अजीत पवार) व शरद पवार गुट की झोली में 7 सीटें आईं।

पूर्व मुख्यमंत्री व सांसद अशोक चव्हाण, सांसद अजीत गोपछड़े की अगुवाई में महायुति ने विधानसभा शत-प्रतिशत जीत हासिल करने के बाद मनपा में भी बेहतरीन प्रदर्शन जारी रखा। कांग्रेस को सत्ता से बेदखल करते हुए 81 सदस्यीय मनपा में सत्ता स्थापित करने में सफल रही। चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने सूक्ष्म संगठनात्मक तंत्र को प्रभावी ढंग से लागू करते हुए सुनियोजित अभियान चलाया।

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष का बयान पड़ा भारी

भाजपा ने भले ही पूरे राज्य में बेहतरीन प्रदर्शन किया, मगर लातूर में वह क्षमता के अनुरुप प्रदर्शन करने में विफल रही। यहां भाजपा प्रदेशाध्यक्ष रवींद्र चव्हाण का बयान 'पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख की यादें मिटा दो' को मतदाताओं ने नकार दिया, यहां विलासराव देशमुख के सुपुत्र विधायक अमित देशमुख के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए मतदाताओं ने स्पष्ट बहुमत दिया। लिंगायत समाज के कांग्रेस के दिवंगत नेता शिवराज पाटील चाकूरकर के निधन के बाद उनकी बहू भाजपा नेता डॉ. अर्चना पाटील चाकूरकर से चुनाव प्रचार प्रमुख पद निकालकर संभाजीराव पाटील-निलंगेकर को भारी पड़ गया।

परभणी में नहीं चला वरपुड़कर का जादू

बूथ-स्तर की रणनीति, मतदाताओं से सीधा संवाद व बेहतरीन प्रबंधन के चलते पार्टी कमल खिलाने में सफल रही। दोनों राकां खाता खोलने में विफल रही। दो विधायक होने के बावजूद शिवसेना (शिंदे) को अपेक्षित सफलता नहीं मिली।

कांग्रेस ने वंचित बहुजन पार्टी के साथ गठबंधन कर दलित मतों के विभाजन को रोकने की रणनीति अपनाई, जो सफल रही। दोनों दलों के क्रमशः 4-4 प्रत्याशी विजयी हुए।

पूर्व मुख्यमंत्री चव्हाण जिस प्रत्याशी के नाम पर नाम पर मुहर लगाएंगे उसके महापौर बनने के आसार हैं। पिछले चुनाव में परभणी में कांग्रेस व राकांपा की सत्ता प्रस्थापित हुई थी। यहां पर केसरिया लहराने के लिए भाजपा ने कांग्रेस के पूर्व विधायक सुरेश वरपुड़कर को अपने खेमे में लिया। हालांकि, परभणीवासियों ने उन्हें नकार दिया।

भाजपा 13 सीटों पर सिमट गई। कांग्रेस के जिला अध्यक्ष व पूर्व विधायक बाबा जानी दुर्राणी, सिद्धार्थ हत्तीबिरे ने गठजोड़ करते हुए भाजपा के सामने न केवल मजबूत चुनौती पेश की, वह सफल रहे।

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