छत्रपति संभाजी नगर (सौ. सोशल मीडिया ) 
औरंगाबाद

Maratha Reservation: अब सड़क से कोर्ट तक, सम्मेलन में तय हुई कानूनी रणनीति

Maratha Reservation को लेकर गुरुवार को एक राज्य स्तरीय गोलमेज बैठक का आयोजन किया गया था। जिसका रिजल्ट ये आया है कि सिर्फ सरकारी आदेश जारी करने से मराठा समुदाय को लाभ नहीं होगा।

अपूर्वा नायक

Chhatrapati Sambhaji Nagar News In Hindi: हैदराबाद गजट के खिलाफ दाखिल याचिकाओं को बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा खारिज किए जाने के बावजूद, मराठा आरक्षण के सवाल पर गुरुवार को आयोजित राज्य स्तरीय गोलमेज परिषद में यह निष्कर्ष निकला गया कि केवल सरकारी आदेश (जीआर) जारी करने से मराठा समाज को कोई ठोस लाभ नहीं मिलेगा।

विद्वानों और कानूनी विशेषज्ञों ने स्पष्ट कहा कि अब बिना कानूनी लड़ाई के समाधान संभव नहीं है, अन्यथा यह समुदाय के साथ सीधा धोखा है। सम्मेलन में राज्यभर से आरक्षण विशेषज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद बड़ी संख्या में जुटे। इसमें जीआर के कानूनी पहलू, प्रमाणपत्र वितरण की अस्पष्टता और भविष्य की रणनीति जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

सम्मेलन का सारांश प्रस्तुत करते हुए डॉ संजय लाखे, डॉ शिवानंद भानुसे और राजेंद्र कोंढरे, ने कहा कि आंदोलन जितना जरूरी है, उतना ही अब न्यायालयीन लड़ाई भी निर्णायक होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार को जल्द से जल्द ठोस कानूनी रुख अपनाना चाहिए और प्रमाणपत्र प्रक्रिया में पारदर्शिता लानी चाहिए, सम्मेलन ने साफ कर दिया कि मराठा समाज की लड़ाई अब सिर्फ सड़कों पर नहीं, बल्कि अदालतों में भी लड़ी जाएगी।

आदेश में जरूरी संशोधन करे सरकार

शिक्षाविद डॉ संजय लाखे पाटील ने कहा कि भले ही उच्च न्यायालय ने 2 सितंबर को याचिकाएं खारिज की हो, सरकार को इस अवसर का लाभउठाकर सरकारी आदेश में जरूरी संशोधन करने चाहिए, उन्होंने मांग की कि छह छात्रों के नाम सार्वजनिक कर उनके प्रमाणपत्र नए आदेश के अनुसार मान्य किए जाएं, इसके अलावा, शिंदे समिति के गठन से पहले और बाद में कितने प्रमाणपत्र जारी हुए, इसका जिला-वार ब्यौरा जारी करना चाहिए, सम्मेलन में डॉ। राजेंद्र दाते, किशोर चव्हाण, अजिक्य पाटिल, सुनील कोटकर, रमेश केरे, रवींद्र काले, विजय काकडे, योगेश शेलके, मुकेश सोनवणे, सतीश देशमुख, राजेंद्र गोरे, शरद देशमुख, डॉ। रावसाहेब लहाने, डॉ। परमेश्वर माने, सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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