प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स : सोशल मीडिया ) 
औरंगाबाद

संस्कृत-पाली आज भी जीवंत हैं: डॉ. प्रफुल्ल गडपाल, भारतीय भाषाओं में अनुवाद करियर का नया अवसर

Sambhajinagar Career Guidance: संस्कृत, पाली व प्राकृत केवल प्राचीन नहीं बल्कि भारतीय दर्शन व संस्कृति की जीवंत भाषाएं हैं-अनुवाद में भाव व संदर्भ बचाना जरूरी है: डॉ. प्रफुल्ल गडपाल।

अंकिता पटेल

MGM University Indian Knowledge: लखनऊ स्थित केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के बौद्ध दर्शन एवं पाली विभाग के प्राध्यापक डॉ. प्रफुल्ल गडपाल ने कहा कि संस्कृत, पाली और प्राकृत भारतीय ज्ञान परंपरा की मूल भाषाएं हैं, जो केवल प्राचीन धरोहर नहीं, बल्कि आज भी दर्शन, नैतिक मूल्यों और संस्कृति की जीवंत संवाहक हैं।

वे महात्मा गांधी मिशन विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन एंड फॉरेन लैंग्वेजेस की ओर से आयोजित ‘भारतीय भाषाओं में अनुवाद क्षेत्र में करियर के अवसर’ विषयक करियर मार्गदर्शन व्याख्यान में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के आइंस्टीन सभागार में आयोजित किया गया।

भाव, संदर्भ और आत्मा का संरक्षण जरूरी

डॉ. गडपाल ने कहा कि अनुवाद करते समय केवल शब्दशः अनुवाद पर्याप्त नहीं होता, बल्कि मूल पाठ के भाव, संदर्भ और आत्मा को सुरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है, विशेषकर दार्शनिक, धार्मिक और साहित्यिक ग्रंथों के अनुवाद में।

उन्होंने अनुवाद की अवधारणा की उत्पत्ति को स्पष्ट करते हुए पाली भाषा की अर्थछटाओं तथा हिंदी, मराठी और अंग्रेजी भाषाओं में पाए जाने वाले अर्थ-भेद को उदाहरणों के माध्यम से समझाया। उन्होंने कहा कि अर्थों को उदाहरणों के जरिए स्पष्ट करना अनुवाद की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।

अनुवाद क्षेत्र में व्यापक करियर अवसर

डॉ. गडपाल ने बताया कि अनुवाद के क्षेत्र में आज करियर की अपार संभावनाएं हैं। इनमें-

  • सरकारी व भाषा आयोगों की परियोजनाएं,

  • शैक्षणिक एवं शोधात्मक अनुवाद,

  • प्रकाशन संस्थान,

  • सांस्कृतिक व शैक्षणिक मंच,

  • पांडुलिपियों व दुर्लभ ग्रंथों का संरक्षण व अनुवाद,

  • डिजिटल ह्यूमैनिटीज,

  • मौखिक परंपराओं व स्थानीय ज्ञान का दस्तावेजीकरण
    जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।

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