Sameer Sattar Withdraw Nomination: महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव को लेकर महायुति ने बागियों को मनाना शुरू कर दिया है। नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि के एक दिन पहले छत्रपति संभाजीनगर से बड़ी खबर सामने आई है। छत्रपति संभाजीनगर-जालना विधान परिषद सीट को लेकर महायुति में उभरे मतभेदों के बीच शिवसेना नेता अब्दुल सत्तार ने अनके बेटे समीर सत्तार का नामांकन वापस लेने के संकेत दे दिए है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से चर्चा के बाद कार्यकर्ताओं को विश्वास में लेकर नामांकन वापस लेने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
अब्दुल सत्तार ने कहा कि सत्ता में आने के लिए महायुति के तीनों दलों ने मिलकर मेहनत की थी, लेकिन सत्ता मिलने के बाद यदि एक दल अपना संगठन मजबूत करे और दूसरे दल को कमजोर करने का प्रयास हो, तो ऐसी स्थिति की जानकारी पार्टी नेतृत्व को देना जरूरी हो जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि छत्रपति संभाजीनगर जिले में भाजपा के कुछ स्थानीय नेताओं का रवैया सहयोगी दलों के प्रति अच्छा नहीं रहा है। इस संबंध में उन्होंने अपनी नाराजगी पार्टी नेतृत्व तक पहुंचाई है।
शिवसेना नेता अब्दुल सत्तार ने बताया कि विधान परिषद चुनाव के मुद्दे पर उनकी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से फोन पर बातचीत हुई। सीएम ने उन्हें नामांकन वापस लेने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि मैं कल कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाऊंगा और उनसे चर्चा कर समीर सत्तार का नामांकन वापस लेने की प्रक्रिया पूरी करूंगा। कार्यकर्ताओं को विश्वास में लेकर निर्णय लेने से किसी तरह की नाराजगी नहीं रहती।
अब्दुल सत्तार ने कहा कि उनकी प्राथमिक चिंता शिवसेना के संगठन और कार्यकर्ताओं की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी से समर्थन हासिल करना नहीं, बल्कि पार्टी को नुकसान से बचाना है। उन्होंने कहा कि छत्रपति संभाजीनगर को बालासाहेब ठाकरे का गढ़ माना जाता है, लेकिन जिले में सहयोगी दलों के कुछ नेताओं की कार्यशैली को लेकर स्थानीय स्तर पर असंतोष है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका विरोध राज्य नेतृत्व से नहीं, बल्कि कुछ स्थानीय नेताओं से है।
सत्तार ने कहा कि राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर शिवसेना भाजपा के साथ मजबूती से खड़ी है और उनकी वजह से महायुति में किसी प्रकार की दरार नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि एकनाथ शिंदे हमारे नेता हैं। वे जो निर्णय लेंगे, वही हमारे लिए अंतिम होगा। हम पूरी तरह उनके निर्णय का पालन करेंगे और महायुति की एकता बनाए रखेंगे।
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अब्दुल सत्तार ने बताया कि छत्रपति संभाजीनगर के 6 विधायक और एक सांसद उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मिले थे। करीब साढ़े तीन घंटे चली इस बैठक में स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि अगले दो दिनों में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी।
शिवसेना (यूबीटी) के नेता अंबादास दानवे से मुलाकात को लेकर उठे सवालों पर अब्दुल सत्तार ने कहा कि यह केवल एक शिष्टाचार भेंट थी। उन्होंने कहा कि इसका कोई राजनीतिक अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए। सत्तार ने दोहराया कि राज्य में भाजपा 'बड़े भाई' की भूमिका में है और उनकी पार्टी सहयोगी के तौर पर महायुति को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि अंतिम निर्णय एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में ही लिया जाएगा और सभी कार्यकर्ता उसी का पालन करेंगे।