

Abdul Sattar Alleges BJP Shiv Sena: महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव 2026 की छत्रपति संभाजी नगर-जालना स्थानीय निकाय सीट महायुति के आंतरिक समीकरणों के लिए गले की हड्डी बन गई है। सीट शेयरिंग के तहत यह सीट भाजपा के खाते में गई है और पार्टी ने यहां से सुहास शिरसाट को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया है। भाजपा के इस एकतरफा फैसले से अब्दुल सत्तार इस कदर भड़क उठे कि उन्होंने मर्यादाओं को लांघते हुए अपनी ही सरकार के 'बड़े भाई' (भाजपा) पर सीधा और तीखा हमला बोल दिया। सत्तार के इस आक्रामक और बागी रुख के कारण महायुति के शीर्ष स्तर पर भारी उथल-पुथल मच गई है, जिसके चलते उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को खुद स्थिति संभालने के लिए मैदान में उतरना पड़ा है।
अब्दुल सत्तार ने अपने गृह क्षेत्र में शिवसेना के वजूद का हवाला देते हुए भाजपा के खिलाफ बेहद विवादास्पद और सनसनीखेज टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था, "भाजपा इस समय शिंदे साहब की शिवसेना को पूरी तरह समाप्त करने की कोशिशों में जुटी है। वे अपने ही सहयोगी दल का सिर कलम कर रहे हैं। भाजपा गुवाहाटी के हमारे उस ऐतिहासिक बलिदान को पूरी तरह विस्मृत कर चुकी है, जिसके दम पर आज सरकार चल रही है। उन्होंने पहले हमारे अंग तोड़े और अब सीधे हमारा सिर काटने पर उतारू हैं।"
अब्दुल सत्तार ने जिला स्तर की राजनीति में भाजपा की कथित दखलंदाजी पर अपना तीव्र आक्रोश व्यक्त करते हुए साफ कहा कि अगर महायुति का बड़ा भाई जिले में शिवसेना को दो फाड़ करने की राजनीति करेगा, एक गुट को शह देकर दूसरे गुट के साथ सरेआम अन्याय करेगा और हमें पूरी तरह बर्बाद करने की राह पर चलेगा, तो फिर हमारे पास भी चुप बैठने के अलावा और भी कई कड़े विकल्प मौजूद हैं। उनके इस बयान को भाजपा नेतृत्व को दिए गए एक सीधे अल्टीमेटम के रूप में देखा जा रहा है।
इस पूरे विवाद की मुख्य जड़ अब्दुल सत्तार के बेटे समीर सत्तार की उम्मीदवारी है, जिन्होंने निर्दलीय मैदान में उतरकर महायुति के आधिकारिक प्रत्याशी सुहास शिरसाट की राह मुश्किल कर दी है। विधान परिषद चुनाव के लिए नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 4 जून है। इससे ठीक पहले मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री हर हाल में इस बगावत को शांत करना चाहते हैं। आज शाम मुंबई में होने वाली इस हाई-प्रोफाइल बैठक में सत्तार को सीधे आदेश दिया जा सकता है कि वे अपने बेटे का नाम वापस कराएं।
अब्दुल सत्तार के बयानों से भाजपा के प्रदेश स्तरीय नेताओं और कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी और गुस्सा है। ऐसे में आज शाम होने वाली इस महत्वपूर्ण आपात बैठक के नतीजों पर पूरे महाराष्ट्र के राजनीतिक पंडितों की निगाहें टिकी हैं। क्या उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सीएम देवेंद्र फडणवीस मिलकर अब्दुल सत्तार की नाराजगी दूर करने में सफल हो पाएंगे? क्या समीर सत्तार अपनी जिद छोड़कर उम्मीदवारी पीछे लेंगे? या फिर महायुति के भीतर का यह आंतरिक संघर्ष आगामी विधानसभा चुनावों से पहले एक बड़े राजनीतिक विस्फोट का रूप ले लेगा, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा।