Sambhajinagar Water Supply Scheme Starts: छत्रपति संभाजीनगर शहर की वर्षों पुरानी पेयजल समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में बुधवार को बड़ा कदम उठाया गया। करीब छह वर्षों की लंबी प्रतीक्षा के बाद 2,740 करोड़ रुपये की नई जलापूर्ति योजना से नियमित जलापूर्ति शुरू कर दी गई।
1,500 मिलीमीटर व्यास की मुख्य पाइपलाइन के माध्यम से सिडको एन-5 स्थित जलाशय क्रमांक-2 और 3 में पानी छोड़ा गया, जहां से सिडको, हडको, चिकलथाना और रामनगर क्षेत्रों में नई योजना के अंतर्गत जलापूर्ति प्रारंभ हुई। इसे शहर की सबसे महत्वपूर्ण आधारभूत परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है, जिससे भविष्य में लाखों नागरिकों को पर्याप्त और नियमित पेयजल उपलब्ध कराने का मार्ग प्रशस्त होगा।
छत्रपति संभाजीनगर की तेजी से बढ़ती आबादी और लगातार बढ़ती पेयजल आवश्यकता को देखते हुए इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत लगभग 1,680 करोड़ रुपये की लागत से की गई थी।
बाद में केंद्र सरकार की अमृत-2 योजना में शामिल होने के बाद परियोजना का दायरा बढ़ा और इसकी कुल लागत 2,740 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। परियोजना के अंतर्गत जायकवाड़ी बांध पर नया जैकवेल, वहां से नक्षत्रवाड़ी तक लगभग 38 किलोमीटर लंबी मुख्य पाइपलाइन, आधुनिक जल शोधन केंद्र, विशाल जलाशय तथा नई वितरण व्यवस्था विकसित की गई है।
गत जून में परीक्षण के तौर पर नई योजना से पानी छोड़ा गया था, लेकिन नक्षत्रवाड़ी पंपगृह में रिसाव तथा मुख्य पाइपलाइन के बटरफ्लाई वाल्व में तकनीकी खराबी आने से जलापूर्ति रोकनी पड़ी। इन समस्याओं के कारण शहरवासियों को कई दिनों तक अनियमित जलापूर्ति का सामना करना पड़ा। बाद में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में परियोजना की समीक्षा की गई। उन्होंने अधिकारियों को सभी तकनीकी बाधाएं तत्काल दूर कर नियमित जलापूर्ति शुरू करने के निर्देश दिए। इसके बाद मरम्मत कार्य युद्धस्तर पर पूरा किया गया और बुधवार से योजना को नियमित रूप से चालू कर दिया गया।
बुधवार को 1,500 मिलीमीटर व्यास की मुख्य पाइपलाइन से सिडको एन-5 स्थित जलाशयों में पानी पहुंचाया गया। इसके बाद सिडको, हडको, चिकलथाना और रामनगर क्षेत्रों में नई योजना के तहत जलापूर्ति शुरू हुई। छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका और संबंधित एजेंसियों के अनुसार शहर के अन्य जल वितरण केंद्रों को भी चरणबद्ध तरीके से नई पाइपलाइन से जोड़ा जाएगा। सभी कार्य पूरे होने के बाद शहर के प्रत्येक क्षेत्र को इसी योजना से नियमित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा।
नई परियोजना के निर्माण के दौरान शहर की जलापूर्ति पूरी तरह प्रभावित न हो, इसके लिए 193 करोड़ रुपये की लागत से एक अलग वैकल्पिक पाइपलाइन भी बिछाई गई थी। परियोजना की प्रगति और गुणवत्ता की निगरानी उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार विभागीय आयुक्त की अध्यक्षता वाली समिति लगातार कर रही है, जिससे कार्यों में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित हो सके।
परियोजना का कार्य कर रही जीवीपीआर कंपनी के मुख्य प्रबंधक महेंद्र गुगुलोथ ने तकनीकी कारणों से हुई देरी और नागरिकों को हुई असुविधा पर खेद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शहरवासियों ने लंबे समय तक धैर्य और सहयोग का परिचय दिया, जिसके लिए कंपनी उनकी आभारी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि शेष क्षेत्रों को भी शीघ्र नई जलापूर्ति व्यवस्था से जोड़ दिया जाएगा।
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विशेषज्ञों के अनुसार नई जलापूर्ति योजना केवल वर्तमान जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले कई दशकों की जल मांग को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
आधुनिक पाइपलाइन और वितरण प्रणाली के कारण पानी की बर्बादी कम होगी, आपूर्ति अधिक सुचारु होगी और भविष्य में बढ़ती आबादी के बावजूद शहर को पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने में यह परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। वर्षों से नियमित पानी की मांग कर रहे शहरवासियों के लिए इस योजना की शुरुआत राहत और उम्मीद की नई किरण मानी जा रही है।
– नवभारत लाइव के लिए छत्रपति संभाजीनगर से शफीउल्ला हुसैनी की रिपोर्ट