छत्रपति संभाजीनगर मनपा (सोर्स: सोशल मीडिया) 
औरंगाबाद

अस्पतालों के बाहर वाहन उठाने पर संभाजीनगर मनपा में हंगामा, पार्षदों ने पूछा- पार्किंग नहीं तो दंड क्यों?

Hospital Parking Issue: छत्रपति संभाजीनगर मनपा की आम सभा में अस्पतालों के बाहर वाहन उठाने पर जमकर हंगामा हुआ। महापौर समीर राजूरकर ने ट्रैफिक इंजीनियर की नियुक्ति और नई पार्किंग नीति के निर्देश दिए।

गोरक्ष पोफली

Chhatrapati Sambhajinagar Hospital Parking Issue: शहर के अस्पतालों के बाहर खड़े वाहनों पर छत्रपति संभाजीनगर मनपा द्वारा की जा रही दंडात्मक कार्रवाई का मुद्दा मंगलवार, 21 अप्रैल को आयोजित आम सभा में गरमा गया। एमजीएम रोड स्थित अस्पतालों के बाहर से चारपहिया वाहन उठाए जाने पर पार्षदों ने प्रशासन को आड़े हाथों लिया। सदस्यों का आरोप था कि प्रशासन मरीजों और उनके लाचार परिजनों की मानवीय स्थिति को समझने के बजाय केवल राजस्व वसूली पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

पार्किंग व्यवस्था के बिना कार्रवाई पर सवाल

भाजपा पार्षद एड. माधुरी अदवंत ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि 'नागरी मित्र' के माध्यम से अस्पताल क्षेत्रों से वाहन उठाने की कार्रवाई सरासर अन्यायपूर्ण है। उन्होंने तर्क दिया कि जब शहर में पार्किंग के लिए पर्याप्त प्रबंध ही नहीं हैं, तो नागरिकों से 2,000 रुपये तक का भारी जुर्माना वसूलना गलत है। कई बार गंभीर मरीजों को भर्ती कराते समय परिजन जल्दबाजी में वाहन सड़क किनारे खड़ा करते हैं, जिसे प्रशासन तुरंत उठा ले जाता है।

ट्रैफिक इंजीनियर की होगी नियुक्ति

पार्षदों के आक्रामक तेवर और आम जनता की परेशानी को देखते हुए महापौर समीर राजूरकर ने प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए। महापौर ने घोषणा की कि शहर में यातायात प्रबंधन के लिए एक स्वतंत्र व्यवस्था खड़ी की जाएगी। इसके लिए एक ट्रैफिक इंजीनियर की नियुक्ति की जाएगी जो शहर की व्यापक पार्किंग नीति (Parking Policy) तय करेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वाहन उठाने की कार्रवाई किसी एक अस्पताल या क्षेत्र तक सीमित न रहकर, उन सभी व्यस्त क्षेत्रों में समान रूप से लागू होनी चाहिए जहाँ वास्तव में ट्रैफिक जाम की समस्या है।

उपमहापौर के व्यावहारिक सुझाव

चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए उपमहापौर राजेंद्र जंजाल ने कहा कि अस्पतालों को अपने परिसर के भीतर पार्किंग की जिम्मेदारी खुद लेनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि वाहन उठाने जैसी कठोर कार्रवाई से पहले लाउडस्पीकर से घोषणा (Announcement) की जाए, स्पष्ट 'नो पार्किंग' बोर्ड लगाए जाएं और अत्यंत आवश्यक होने पर ही जैमर का उपयोग किया जाए। उनके इन सुझावों का सदन के सभी सदस्यों ने स्वागत किया।

पक्षपात के आरोप और निष्पक्षता की मांग

चर्चा के दौरान सुरेंद्र कुलकर्णी, शिल्पारानी वाडकर, किशोर नागरे और सुनील जगताप ने भी अपने अनुभव साझा किए। कुछ सदस्यों ने आरोप लगाया कि प्रशासन किसी विशेष अस्पताल की शिकायत पर ही चयनात्मक कार्रवाई कर रहा है, जबकि बड़े होटलों और व्यावसायिक परिसरों के बाहर अतिक्रमण को नजरअंदाज किया जा रहा है। किशोर नागरे ने मांग की कि प्रोजोन मॉल जैसे व्यस्त इलाकों में सख्ती जरूरी है, लेकिन अस्पतालों के पास मरीजों को राहत दी जानी चाहिए।

छत्रपति संभाजीनगर मनपा की इस बैठक से यह स्पष्ट हो गया है कि शहर में पार्किंग एक विकराल समस्या बन चुकी है। अब सबकी नजरें प्रशासन द्वारा नियुक्त किए जाने वाले ट्रैफिक इंजीनियर और नई पार्किंग नीति पर टिकी हैं, जिससे आम नागरिकों को दंड से और शहर को ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिल सके।

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