Chhatrapati Sambhajinagar EP map Changes: छत्रपति संभाजीनगर जिले के किस हिस्से से सड़क गुजरेगी, किस सड़क की चौड़ाई बढ़ेगी या घटेगी और किस भूखंड पर आरक्षण कायम रहेगा, इन सवालों का जवाब अब नागरिकों को मिल सकेगा।
शहर विकास प्रारुप के बाहर रखे गए हिस्से यानी ईपी के संशोधित नक्शे आखिरकार नागरिकों के लिए उपलब्ध होने जा रहे हैं। शासन से सोमवार को नक्शे प्राप्त होने के बाद उन्हें महानगरपालिका की वेबसाइट पर उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
मंगलवार दोपहर के बाद नागरिक इन नक्शों को ऑनलाइन देख और डाउनलोड कर सकेंगे। साथ ही नगर रचना विभाग के कार्यालय में भी नक्शे देखने की व्यवस्था की गई है। ईपी को शासन की मंजूरी और राजपत्र में प्रकाशन के करीब ढाई महीने बाद नक्शे सार्वजनिक किए जा रहे हैं।
इन नक्शों में शहर के विभिन्न हिस्सों में करीब 450 बदलाव किए जाने की जानकारी सामने आई है। खासकर सड़क की नई रूपरेखा और चौड़ाई में किए गए बदलावों ने सड़क किनारे की संपत्तियों के मालिकों की चिंता बढ़ा दी है। अब यह स्पष्ट होगा कि विकास प्रारूप में प्रस्तावित बदलावों का असर किसकी जमीन, मकान या दुकान पर पड़ रहा है।
ईपी में कई इलाकों की सड़कों की पुरानी रूपरेखा में बदलाव किया गया है। कुछ प्रस्तावित सड़कों को रद्द कर संबंधित जमीन को आवासीय क्षेत्र में शामिल किया गया है। वहीं कुछ स्थानों पर 12 मीटर चौड़ी प्रस्तावित सड़क को घटाकर 9 मीटर किया गया है।
कुछ इलाकों में पहले से प्रस्तावित सड़क की दिशा बदलकर नया मार्ग निर्धारित किया गया है। बताया जा रहा है कि कई स्थानों पर मौजूदा मकानों और निर्माणों को बचाने के उद्देश्य से सड़क की पुरानी रूपरेखा में बदलाव किया गया है। हालांकि, इसका वास्तविक असर किस संपत्ति पर पड़ेगा, यह नक्शे देखने के बाद ही स्पष्ट होगा।
ईपी के नक्शे सामने आने के बाद शहर के नागरिक सबसे पहले अपने क्षेत्र की स्थिति जांचेंगे। उनकी नजर इस बात पर होगी कि प्रस्तावित सड़क उनके भूखंड से गुजर रही है या नहीं। सड़क की सीमा में उनकी जमीन या मकान आ रहा है या नहीं।
सड़क की चौड़ाई में कितना बदलाव हुआ है और नया मार्ग किस दिशा से निर्धारित किया गया है। इसी तरह जिन क्षेत्रों में हरित क्षेत्र, आवासीय क्षेत्र या अन्य प्रकार के आरक्षण में बदलाव हुआ है, वहां के संपत्ति धारक भी नए नक्शे का अध्ययन करेंगे। इससे नगर रचना विभाग के कार्यालय में भीड़ बढ़ने की संभावना है।
राज्य सरकार ने शहर के विकास आराखड़े को 15 अप्रैल 2025 को मंजूरी दी थी। हालांकि, आराखड़े के कुछ हिस्सों में बदलाव और सुधार की प्रक्रिया अलग से चल रही थी। इसी के तहत ईपी की प्रक्रिया शुरू की गई।
शासन ने 14 मई 2026 को ईपी को मंजूरी दी और 15 मई को इसे राजपत्र में प्रकाशित किया गया। राजपत्र में की गई व्यवस्था के अनुसार ईपी के नक्शे तैयार करने की जिम्मेदारी नगररचना विभाग को दी गई थी। विभाग के अधिकारियों ने नक्शे तैयार कर शासन की मंजूरी के लिए भेजे थे।
नगररचना विभाग की ओर से नक्शे तैयार करने का काम करीब एक महीने में पूरा होने का दावा किया जा रहा था। इसके बावजूद नागरिकों के लिए नक्शे उपलब्ध होने में करीब ढाई महीने का समय लग गया। अब शासन से नक्शे प्राप्त होने के बाद उन्हें डिजिटल रूप में उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
ईपी में शहर के विभिन्न हिस्सों में बदलाव किए गए हैं। पडेगाव, मिटमिटा, रावरसपुरा, जयसिंगपुरा, भावसिंगपुरा, बायजीपुरा, हरसुल, जाधववाडी, चिकलथाना, मुकुंदवाडी, नारली बाग, पहाडसिंगपुरा, मोंढा नाका, गुलमंडी, जसवंतपुरा और हर्षनगर सहित कई क्षेत्रों के नागरिक अब नए नक्शों को लेकर उत्सुक हैं।
इन इलाकों में सड़क की रूपरेखा, चौड़ाई, आरक्षण और जमीन के उपयोग में किए गए बदलावों का सीधा असर संपत्ति धारकों पर पड़ सकता है। इसलिए संबंधित क्षेत्रों में नक्शे सार्वजनिक होने के बाद उन्हें देखने के लिए नागरिकों की भीड़ उमड़ने की संभावना है।
संभाजीनगर मनपा के नगर रचना विभाग के उप संचालक मनोज गर्जे के अनुसार, शासन से प्राप्त नक्शों को स्कैन कर महानगरपालिका की वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जा रहा है। मंगलवार 11 अगस्त की दोपहर के बाद नागरिक इन्हें ऑनलाइन देख सकेंगे और आवश्यकतानुसार डाउनलोड भी कर सकेंगे।
इसके अलावा नगर रचना विभाग के कार्यालय में भी नागरिकों के लिए नक्शे देखने की सुविधा उपलब्ध रहेगी। इससे नागरिक अपने क्षेत्र में हुए बदलावों की जानकारी सीधे नक्शे के माध्यम से ले सकेंगे।
प्रस्तावित सड़क मेरी संपत्ति से होकर तो नहीं गुजर रही?
सड़क की चौड़ाई बढ़ी है या घटाई गई है?
पुरानी सड़क की दिशा बदलकर नया मार्ग कहां से निकाला गया है?
मेरी जमीन पर आरक्षण या क्षेत्र के उपयोग में कोई बदलाव हुआ है या नहीं?
ईपी के नक्शे सार्वजनिक होने के बाद इन सवालों का जवाब मिलने की उम्मीद है। खासकर उन संपत्तिधारकों के लिए ये नक्शे महत्वपूर्ण होंगे, जिनकी जमीन प्रस्तावित सड़कों, आरक्षण या क्षेत्र उपयोग में बदलाव की सीमा में आती है। अब तक केवल राजपत्र और विकास आराखड़े में दर्ज प्रावधानों तक सीमित रही चर्चा वास्तविक नक्शों के सामने आने के बाद अधिक स्पष्ट होने वाली है।