अब्दुल सत्तार और अंबादास दानवे (सोर्स: नवभारत फाइल फोटो) 
औरंगाबाद

विधान परिषद चुनाव के बीच सत्तार-दानवे की मुलाकात से बढ़ीं सियासी अटकलें, बदलते समीकरणों की चर्चा तेज

Maharashtra Vidhan Parishad: औरंगाबाद-जालना विधान परिषद चुनाव के बीच शिंदे गुट के मंत्री अब्दुल सत्तार और ठाकरे गुट के नेता अंबादास दानवे की अचानक हुई मुलाकात से जिले का राजनीतिक पारा चढ़ गया है।

रूपम सिंह

Chhatrapati Sambhajinagar Jalna MLC Election Abdul Sattar: औरंगाबाद- जालना विधान परिषद चुनाव के बीच शिवसेना के विधायक अब्दुल सत्तार और विधान परिषद में विपक्ष के पूर्व नेता अंबादास दानवे की मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। सत्तार के पुत्र के निर्दलीय नामांकन और उसके बाद दोनों नेताओं की गर्मजोशी भरी मुलाकात को भविष्य के राजनीतिक बदलावों का संकेत माना जा रहा है।

अब सभी की नजरें 4 जून को होने वाली नामांकन वापसी प्रक्रिया पर टिकी हैं। विधान परिषद चुनाव को लेकर जिले की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (शिंदे गुट) के वरिष्ठ नेता एवं मंत्री अब्दुल सत्तार तथा शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के नेता अंबादास दानवे की मुलाकात ने राजनीतिक चर्चाओं को नया आयाम दे दिया है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मुलाकात आने वाले समय में बदलते राजनीतिक समीकरणों का संकेत हो सकती है। सोमवार को विधान परिषद चुनाव के लिए कुल सात उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया। महाविकास आघाड़ी की ओर से एड। देवयानी डोणगांवकर और महायुति की ओर से भाजपा उम्मीदवार सुहास शिरसाट मैदान में हैं।

दोनों ने एक-दूसरे का किया स्वागत

इसी बीच मंगलवार को समृद्धि महामार्ग पर सत्तार और दानवे की अचानक मुलाकात हुई। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे का गर्मजोशी से स्वागत किया और कुछ समय तक बातचीत भी की। बताया जा रहा है कि सत्तार ने दानवे को मुंबई में मुलाकात के लिए आमंत्रित भी किया। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में नई संभावनाओं को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्थानीय निकायों, जिला परिषद और पंचायत समिति स्तर पर पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलने को लेकर शिंदे गुट के कुछ नेताओं में असंतोष है। यही नाराजगी अब खुलकर सामने आती दिखाई दे रही है। ऐसे समय में सतार का बयान, उनके समर्थित उम्मीदवार का नामांकन और दानवे के साथ उनकी मुलाकात को आगामी राजनीतिक समीकरणों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

अब सबकी निगाहें 4 जून पर टिकी हैं। नामांकन वापसी के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि चुनाव में सीधी टक्कर होगी या फिर मुकाबला बहुकोणीय रूप लेगा। साथ ही सत्तार और दानवे की मुलाकात का राजनीतिक असर आने वाले दिनों में किस रूप में सामने आता है, इस पर भी राजनीतिक दलों और कार्यकर्ताओं की नजर बनी हुई है।

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