छत्रपति संभाजीनगर के AIMIM के पार्षद मतीन पटेल व नासिक TCS धर्मांतरण केस की आराेपी निदा खान (डिजाइन फोटो) 
औरंगाबाद

Explainer: क्या निदा खान को पनाह देने से जाएगी AIMIM पार्षद मतीन पटेल की कुर्सी? जानिए क्या कहता है कानून

AIMIM Matin Patel In Trouble: TCS धर्मांतरण केस की आरोपी निदा खान को पनाह देने के आरोप के बाद अब AIMIM पार्षद मतीन पटेल पर अयोग्यता की तलवार लटक रही है। जानें क्या कहता है महाराष्ट्र नगर निगम कानून।

आकाश मसने

Corporator Disqualification Legal Rules: नासिक TCS केस इस समय पूरे महाराष्ट्र के साथ-साथ राजनीति हलकों में भी चर्चाओं में है। इस धर्मांतरण मामले की मुख्य आरोपी निदा खान को 7 मई को छत्रपति संभाजीनगर से गिरफ्तार किया गया। इस गिरफ्तारी के बाद महाराष्ट्र की सियासत में हड़कंप मच गया। क्योंकि निदा को जिस जगह से पकड़ा गया वह AIMIM पार्षद मतीन पटेल की कथित तौर पर मालिकाना हक वाली प्रॉपर्टी थी। इस घटना ने अब पहली बार पार्षद बने मतीन पटेल के लिए कई मुश्किलों की एक कड़ी शुरू कर दी।

यह मामला उजागर होने के बाद छत्रपति संभाजीनगर महानगर पालिका ने मतीन पटेल को कथित अवैध निर्माणों को लेकर एक नोटिस जारी किया है। साथ ही मेयर समीर राजुरकर ने चेतावनी दी है कि मतीन पटेल अपनी सीट गंवा सकते हैं। इस बयान के बाद लोगों के मन में एक सवाल उठ रहा है कि क्या कोई चुना हुआ पार्षद अपना कार्यकाल पूरा करने से पहले ही अपना पद गंवा सकता है? आइए जानते हैं इस बारे कानून क्या कहता है।

क्या कहता है कानून ?

महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम के तहत, चुने हुए पार्षदों को एक दर्जन से अधिक आधारों पर अयोग्य ठहराया जा सकता है। हटाया जा सकता है या उन्हें अपना पद छोड़ने के लिए मजबूर किया जा सकता है। इन आधारों में अवैध निर्माण और आपराधिक दोषसिद्धि से लेकर नागरिक बकाया का भुगतान न करना, हितों का टकराव और यहां तक कि घर में शौचालय न होना भी शामिल है।

क्या किसी पार्षद को अयोग्य ठहराया जा सकता है?

महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम की धारा 10 के तहत, अयोग्यता चुनाव से पहले, चुनाव के तुरंत बाद, या पार्षद के कार्यकाल के दौरान किसी भी समय हो सकती है। इसका जिक्र पिछले दिनों छत्रपति संभाजीनगर के मेयर ने भी किया था। इसके कई आधार है।

  • आपराधिक दोषसिद्धि: IPC की धारा 153A या धारा 505 के तहत अपराधों के लिए दोषी पाए जाने पर, या नैतिक अधमता (moral turpitude) से जुड़े अपराधों के लिए कोई पार्षद अपनी पात्रता खो सकता है। न्यायालयों ने इस शब्द की व्याख्या करते हुए इसमें बेईमानी, धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार, ठगी और यौन अपराधों को शामिल किया है।
  • अवैध निर्माण: यदि कोई पार्षद, उसका जीवनसाथी या उस पर निर्भर कोई व्यक्ति कोई अवैध ढांचा बनाता है, किसी अनाधिकृत निर्माण में सहायता करता है या उसे गिराने की कार्रवाई में बाधा डालता है। तो वह पार्षद अपना पद गंवा सकता है।
  • दो-बच्चों का नियम: नियम के मुताबिक दो से अधिक बच्चे होने पर किसी कॉर्पोरेटर को अयोग्य घोषित किया जा सकता है। हालांकि, इस संशोधन से पहले जन्मे बच्चों, एक साथ जन्मे कई बच्चों (multiple births) और गोद लिए गए बच्चों के मामले में कुछ अपवाद मौजूद हैं।

क्या मतीन पटेल को अयोग्य घोषित किया जा सकता है?

AIMIM पार्षद मतीन पटेल पर कानून के तहत अवैध निर्माण से जुड़े प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा रही है। कानून कहता है कि कोई भी कॉर्पोरेटर अपना पद खो सकता है अगर वह अवैध निर्माण करता है या उसका जीवनसाथी या उस पर निर्भर कोई व्यक्ति अवैध निर्माण में शामिल है या वह किसी अनाधिकृत निर्माण में मदद करता है।

छत्रपति संभाजीनगर के AIMIM के पार्षद मतीन पटेल (सोर्स: सोशल मीडिया)

सबसे अहम बात यह है कि नासिक TCS धर्मांतरण केस की आरोपी निदा खान को कथित तौर पर पनाह देने के लिए मतीन पटेल को अयोग्य घोषित नहीं किया जा रहा है। कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिसमें यह कहा गया हो कि किसी आरोपी को पनाह देने के कारण वह अपना पद गंवा देगा।

जिस आरोप की वजह से मतीन पटेल की सीट खतरे में है वह उनकी दो संपत्तियां है। पहली कौसर बाग में स्थित वह घर जहां कथित तौर पर निदा खान रह रही थीं और दूसरी उसी इलाके में स्थित एक दफ्तर जो अवैध रूप से बनाया गया है। चाहे वे आंशिक रूप से अवैध हों या पूरी तरह से। इस कानून के तहत, सिर्फ यही एक वजह उन्हें पद से हटाने के लिए काफी है।

मतीन पटेल ने खटखटाया कोर्ट का दरवाजा

छत्रपति संभाजीनगर मनपा ने 9 मई को मतीन पटेल को एक नोटिस जारी किया, जिसमें उन्हें जवाब देने के लिए तीन दिन का समय दिया गया। आज उसका आखिरी दिन है। अगर उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो नगर निगम ने कहा है कि वह उन संपत्तियों को गिराने की कार्रवाई आगे बढ़ाएगा।

मतीन पटेल को अयोग्य घोषित किए जाने के सवाल पर छत्रपति संभाजीनगर मनपा मेयर समीर राजुरकर ने कहा है कि इस बारे में फैसला सदन और नगर निगम आयुक्त मिलकर लेंगे। पटेल ने नोटिस का जवाब देने के लिए 15 दिन का समय मांगते हुए स्थानीय अदालत का दरवाजा खटखटाया है। साथ ही उन्होंने किसी भी तरह की जबरदस्ती वाली कार्रवाई पर रोक लगाने की भी गुजारिश की है।

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